राजनाथ सिंह की चेतावनी: सिर्फ समुद्र नहीं, अंडरसी केबल और पोर्ट्स की सुरक्षा भी जरूरी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समुद्री सुरक्षा के बदलते स्वरूप पर जोर देते हुए अंडरसी केबल और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा का आह्वान किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित इंडियन इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग (IPRD) के दौरान समुद्री सुरक्षा के बदलते स्वरूप को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब देश की सुरक्षा रणनीति केवल पारंपरिक समुद्री रास्तों (Sea Lanes) की निगरानी तक सीमित नहीं रह सकती।
अंडरसी केबल और डेटा सुरक्षा पर विशेष ध्यान
रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्री सुरक्षा का दायरा अब काफी व्यापक हो गया है। उन्होंने अंडरसी डेटा केबल्स, बंदरगाहों (Ports), और ऑफशोर ऊर्जा भंडारों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा करते हुए बताया कि:
- दुनिया का 95% से अधिक इंटरनेट ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलों के माध्यम से गुजरता है।
- वैश्विक वित्तीय लेनदेन का एक बहुत बड़ा हिस्सा भी इन्हीं केबलों पर निर्भर है।
ऐसे में इन संचार नेटवर्कों को सुरक्षित रखना अब केवल एक तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय सुरक्षा अनिवार्यता बन गया है।
नए और गैर-पारंपरिक खतरों की चुनौती
राजनाथ सिंह ने आगाह किया कि भविष्य के खतरे केवल पारंपरिक सैन्य गतिविधियों से ही नहीं आएंगे, बल्कि कई गैर-पारंपरिक चुनौतियों से भी पैदा हो सकते हैं। उन्होंने निम्नलिखित खतरों की पहचान की:
- समुद्री डकैती और तस्करी।
- अवैध मछली पकड़ना (Illegal Fishing)।
- साइबर हमले और समुद्री बुनियादी ढांचे पर हमले।
- प्राकृतिक आपदाएं।
"समुद्री सुरक्षा के प्रति हमारी समझ को बदलते समुद्री परिवेश के साथ विकसित होना चाहिए।" — राजनाथ सिंह
भारत की मजबूत होती समुद्री रणनीति
भारत अब अपनी मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA) को और अधिक व्यापक और आधुनिक बना रहा है। इसका उद्देश्य केवल समुद्री रास्तों की गश्त करना नहीं, बल्कि उन आर्थिक केंद्रों की रक्षा करना भी है जो देश की प्रगति के लिए अनिवार्य हैं।
भारतीय नौसेना इस दिशा में लगातार काम कर रही है। निगरानी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जैसे:
- स्वचालित तटीय रडार श्रृंखला (Automated Coastal Radar Chains)।
- सैटेलाइट-आधारित ट्रैकिंग।
- ध्वनिक सेंसर (Acoustic Sensors)।
- मानवरहित हवाई वाहन (UAVs)।
इन सभी प्रयासों का मुख्य लक्ष्य हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) और इंडो-पैसिफिक में नियमों पर आधारित नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना और देश की आर्थिक संप्रभुता की रक्षा करना है।