राजनाथ सिंह की समुद्री सुरक्षा पर चेतावनी: बढ़ता खतरा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इंडो-पैसिफिक डायलॉग में समुद्री व्यापार में बाधाओं और नेविगेशन की स्वतंत्रता पर बढ़ते खतरों के प्रति आगाह किया।

नई दिल्ली में आयोजित 'इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग 2026' के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि वैश्विक समुद्री वातावरण में जानबूझकर की जा रही व्यापारिक बाधाएं और नौवहन की स्वतंत्रता को दी जा रही चुनौतियां अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर रही हैं।
व्यापार और नेविगेशन को निशाना बनाने की कोशिश
रक्षा मंत्री ने आगाह किया कि कुछ राष्ट्र और ताकतें समुद्रों के रणनीतिक महत्व का फायदा उठाकर अपने एकतरफा लाभ के लिए इनका उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संकीर्ण समुद्री रास्तों का सैन्यीकरण (weaponisation) किया जा रहा है, जिससे न केवल व्यापार प्रभावित हो रहा है, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता पर भी गहरा साया डाल रहा है। सिंह के अनुसार, कुछ देश समुद्र के साझा लाभों को मानव जाति से छीनकर अपने निजी स्वार्थों को पूरा करने की कोशिश में लगे हैं।
डिजिटल और आर्थिक दुनिया का आधार है समुद्र
समुद्र की महत्ता को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि आधुनिक दुनिया समुद्रों पर कितनी गहराई से निर्भर है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा करते हुए कहा कि भले ही डेटा मिलीसेकंड में पूरी दुनिया में घूम जाता है, लेकिन 95 प्रतिशत से अधिक डिजिटल ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलों के माध्यम से ही संचालित होता है।
रक्षा मंत्री ने समुद्र के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी प्रकाश डाला:
- दुनिया भर के कारखाने, खेत और शहर भौतिक वस्तुओं की आवाजाही के लिए समुद्री मार्गों पर निर्भर हैं।
- समुद्र तटीय मत्स्य पालन (fisheries) का मुख्य आधार है।
- यह वैश्विक जलवायु को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- भविष्य के उद्योगों के लिए आवश्यक संसाधन भी समुद्रों में ही मौजूद हैं।
वैश्विक सहयोग की आवश्यकता
राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि व्यापार, संचार, आर्थिक गतिविधियों और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए हम समुद्रों पर कितने निर्भर हैं। इसके बावजूद, कुछ तत्व इन समुद्री मार्गों का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि समुद्री डोमेन में बढ़ती अस्थिरता आने वाले समय में वैश्विक व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।