शौर्य दिवस: राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के जवानों को किया नमन

शौर्य दिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के इन्फैंट्री जवानों के साहस और बलिदान को सलाम किया और उनके योगदान को याद किया।

Ghazala Saheb27 October 20262 min read0 viewsBihar
शौर्य दिवस: राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के जवानों को किया नमन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शौर्य दिवस के अवसर पर भारतीय सेना के वीर इन्फैंट्री जवानों के अदम्य साहस, वीरता और बलिदान को सलाम किया है। उन्होंने देश की संप्रभुता की रक्षा में जवानों के योगदान को याद करते हुए कहा कि राष्ट्र उनके त्याग के लिए सदैव ऋणी रहेगा।

राजनाथ सिंह ने जवानों के साहस को सराहा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए रक्षा मंत्री ने लिखा, "शौर्य दिवस पर, मैं भारतीय सेना के बहादुर इन्फैंट्री जवानों के असाधारण साहस, वीरता और बलिदान को सलाम करता हूं।"

"1947 के ऐतिहासिक युद्धक्षेत्रों से लेकर आज की सबसे चुनौतीपूर्ण सीमाओं तक, उन्होंने तब मोर्चा संभाला जब परिस्थितियां बेहद कठिन थीं। जब देश को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब वे अडिग रहे और भारत को गर्व से खड़ा रखने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।"

उन्होंने आगे कहा कि जवानों का कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण और सर्वोच्च बलिदान देने की तत्परता हमारी सशस्त्र सेनाओं की बेहतरीन परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती है। राष्ट्र को अपनी इन्फैंट्री पर बेहद गर्व है।

केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने भी दी श्रद्धांजलि

इसी क्रम में, केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने भी भारतीय सेना के इन्फैंट्री कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने देश की सीमाओं और संप्रभुता की रक्षा में जवानों के साहस और बलिदान की सराहना की।

किशन रेड्डी ने कहा, "80वें इन्फैंट्री दिवस (शौर्य दिवस) के अवसर पर, मैं राष्ट्र की सेवा में भारतीय सेना के इन्फैंट्री के बहादुर सैनिकों के अटूट साहस, वीरता और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।"

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय सेना ने हमेशा प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हुए राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा की है और देश की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखा है।

क्या है शौर्य दिवस का इतिहास?

हर साल 27 अक्टूबर को मनाया जाने वाला इन्फैंट्री दिवस राष्ट्र के इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है। इस दिन का महत्व निम्नलिखित कारणों से है:

  • 1947 का ऐतिहासिक क्षण: 27 अक्टूबर 1947 को भारतीय सेना के इन्फैंट्री जवान श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरने वाले पहले सैनिक थे।
  • घुसपैठ का मुकाबला: इन सैनिकों ने असाधारण साहस का परिचय देते हुए पाकिस्तान समर्थित कबीलाई आक्रमण को विफल किया था।
  • क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा: इन ऑपरेशनों ने भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह अवसर देश की संप्रभुता की रक्षा में इन्फैंट्री के अडिग समर्पण और बेमिसाल वीरता की याद दिलाता है।

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