चावल उत्पादन में भारत बने ग्लोबल लीडर, किसानों को बाजार से जोड़ना जरूरी: रामनाथ कोविंद
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भारत को चावल की गुणवत्ता और टिकाऊ खेती के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व हासिल करने का आह्वान किया।

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चावल उत्पादन और किसान के भविष्य को लेकर एक बड़ा विजन साझा किया है। 'भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2026' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को केवल दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक और निर्यातक बनकर नहीं रुकना चाहिए, बल्कि हमें गुणवत्ता, टिकाऊ खेती और वैल्यू एडिशन (मूल्यवर्धन) के मामले में वैश्विक लीडर बनना चाहिए।
पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने की आवश्यकता
कोविंद ने जोर देकर कहा कि चावल की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने की जरूरत है। इसमें खेती और कटाई से लेकर भंडारण, परिवहन, प्रसंस्करण और अंतरराष्ट्रीय विपणन तक सब कुछ शामिल है। उन्होंने बताया कि बेहतर बीजों और आधुनिक खेती के तरीकों से उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। वहीं, वैज्ञानिक भंडारण और कुशल परिवहन के माध्यम से कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
जलवायु परिवर्तन और संसाधनों का संरक्षण
कृषि के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण खेती के तरीकों में बदलाव लाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा:
"हमें पानी की खपत कम करते हुए और मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए उत्पादकता बढ़ानी होगी।"
उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि आधुनिक तकनीक छोटे किसानों और उद्यमों तक आसानी से पहुंचनी चाहिए।
गांवों तक पहुंचे विकास का लाभ
रामनाथ कोविंद ने किसानों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि तकनीक तक पहुंच, बाजार की जरूरतों की समय पर जानकारी और भरोसेमंद खरीदारों के माध्यम से किसानों को बेहतर रिटर्न मिल सकता है। उन्होंने एक ऐसे 'चावल अर्थव्यवस्था' का सपना साझा किया जहां वैश्विक स्तर पर होने वाली वृद्धि का सीधा और सार्थक लाभ गांवों के स्तर तक पहुंचे।
विकसित भारत 2047 का लक्ष्य
उन्होंने खाद्य सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इसका मतलब केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि भोजन का उपलब्ध, किफायती, सुलभ और पौष्टिक होना भी है। उन्होंने तीन मुख्य प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया:
- किसानों को बाजारों से जोड़ने वाली मजबूत साझेदारी बनाना।
- उत्पादकता बढ़ाने और संसाधनों की रक्षा के लिए नवाचार (innovation) में निवेश करना।
- विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार को मजबूत करना।
कोविंद ने उम्मीद जताई कि ये प्रयास 2047 तक विकसित भारत के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।