IIT बॉम्बे में छात्र की मौत पर भड़के रामदास अथावले: बोले- 'क्या जातिगत भेदभाव के कारण छात्र कर रहे हैं आत्महत्या?'

IIT बॉम्बे जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। 20 वर्षीय मेधावी छात्र साहिल वाकोडे ने 18 सितंबर को आत्महत्या कर ली। इस घटना ने न केवल संस्थान के भीतर के माहौल पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि केंद्रीय मंत्री रामदास अथावले ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है।
क्या जातिगत भेदभाव का शिकार हुआ मेधावी छात्र?
केंद्रीय मंत्री रामदास अथावले ने इस मामले को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने IIT बॉम्बे के निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अथावले ने कहा:
"पिछले दो से तीन वर्षों में यहाँ कम से कम चार छात्रों ने आत्महत्या की है। उनमें से तीन छात्र अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से थे। क्या यहाँ भेदभाव किया जा रहा है? क्या अनुसूचित जाति के छात्रों को अपमानित करने की कोशिश की जा रही है?"
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी को पत्र लिखेंगे और उनसे मुलाकात करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।
परीक्षा के दौरान क्या हुआ था?
साहिल वाकोडे कोई साधारण छात्र नहीं थे। यवतमाल के रहने वाले साहिल ने अपनी कड़ी मेहनत से 1.5 मिलियन (15 लाख) उम्मीदवारों के बीच मेरिट सूची में 631वीं रैंक हासिल की थी। वह ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग में बी.टेक के दूसरे वर्ष के छात्र थे।
घटनाक्रम के अनुसार, 18 सितंबर को जब साहिल अपनी सेमेस्टर परीक्षा दे रहे थे, तब डीन (जिनका नाम अथावले ने 'दुल्ला' या कुछ मिलता-जुलता बताया) ने उन पर नकल करने का आरोप लगाया। आरोप लगाते हुए उन्होंने साहिल का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया। इस घटना के कुछ ही समय बाद साहिल ने आत्महत्या कर ली।
परिजनों की मांग और प्रशासन पर सवाल
साहिल के परिवार ने संस्थान पर उत्पीड़न और जाति आधारित भेदभाव का आरोप लगाया