रामविलास पासवान की छठी पुण्यतिथि: किशनगंज में लोजपा ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

बिहार के किशनगंज में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय रामविलास पासवान की छठी पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण तरीकेना याद किया गया। गुरुवार को किशनगंज के हलीम चौक स्थित दर्जी बस्ती में पार्टी के जिला कार्यालय में एक विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान पार्टी के दिग्गज नेताओं और समर्पित कार्यकर्ताओं ने पासवान के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके द्वारा किए गए सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान को याद किया।
सामाजिक न्याय के योद्धा थे पासवान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोजपा (रामविलास) के जिलाध्यक्ष हबीबुर रहमान ने कहा कि स्वर्गीय रामविलास पासवान के विचार और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता आज भी पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है। उन्होंने कहा कि पासवान ने हमेशा समाज के वंचित वर्गों के हक की लड़ाई लड़ी। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने उनके बताए हुए मार्ग पर चलने और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों की आवाज को मजबूती से उठाने का संकल्प भी लिया।
दलितों और वंचितों की बुलंद आवाज
युवा जिलाध्यक्ष कुंदन कुमार सिंह ने पासवान के जीवन और उनके कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे देश के दलित, वंचित और असहाय लोगों की सबसे मजबूत आवाज थे। उन्होंने बताया कि पासवान ने अपने लंबे राजनीतिक सफर में विभिन्न महत्वपूर्ण केंद्रीय मंत्रालयों की जिम्मेदारी बखूबी निभाई और हमेशा आम जनता के हितों को सर्वोपरि रखा।
कुंदन कुमार सिंह ने उनके कुछ प्रमुख कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि:
- संचार क्रांति: संचार क्षेत्र में मोबाइल सेवाओं की पहुंच आम आदमी तक बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
- रेलवे में रोजगार: रेलवे के माध्यम से गरीबों और मजदूरों के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में उनका बड़ा योगदान रहा।
- जनता से जुड़ाव: उनका 12 जनपथ स्थित आवास हमेशा आम लोगों के लिए खुला रहता था और वे हमेशा जनता की समस्याएं सुनने के लिए तत्पर रहते थे।
- कोरोना काल में मदद: महामारी के दौरान जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाना और 'एक देश, एक राशन कार्ड' जैसी पहल को आगे बढ़ाने में भी उनकी भूमिका अहम रही।
भारत रत्न देने की उठी मांग
कुंदन कुमार सिंह ने आगे कहा कि रामविलास पासवान ने छह प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में देश की सेवा की और करोड़ों युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बने। उन्होंने स्वर्गीय पासवान के सम्मान में उन्हें 'भारत रत्न' से सम्मानित किए जाने की पुरजोर मांग की। कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह सम्मान उनके द्वारा देश और समाज को दिए गए योगदान के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी।