फिनटेक को काम दिया, पर जिम्मेदारी बैंक की! RBI ने दी बड़ी चेतावनी

Ghazala Saheb21 October 20262 min read0 viewsBihar
फिनटेक को काम दिया, पर जिम्मेदारी बैंक की! RBI ने दी बड़ी चेतावनी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर स्वामिनाथन जे ने बैंकों को एक बेहद महत्वपूर्ण चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि बैंक अपनी सेवाएं, जैसे लोन सोर्सिंग, प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूशन या निर्णय लेने की प्रक्रिया, फिनटेक कंपनियों या किसी तीसरे पक्ष के प्लेटफॉर्म को आउटसोर्स करते हैं, तो भी उन सेवाओं से जुड़े जोखिमों के लिए बैंक ही पूरी तरह जिम्मेदार होंगे।

आउटसोर्सिंग से खत्म नहीं होती नियामक जवाबदेही

मुंबई में आयोजित 'FE Modern BFSI Summit 2026' को संबोधित करते हुए स्वामिनाथन जे ने कहा कि वित्तीय गतिविधियों को बाहर से करवाना (Outsourcing) किसी संस्थान की नियामक जवाबदेही (Regulatory Accountability) को कम नहीं करता है।

"एक लोन फिनटेक के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है, किसी बाहरी प्लेटफॉर्म के जरिए उत्पाद वितरित किया जा सकता है, या किसी तीसरे पक्ष के मॉडल द्वारा निर्णय लिया जा सकता है। प्रक्रिया आउटसोर्स की जा सकती है, लेकिन संस्थान के लाइसेंस से जुड़ी जिम्मेदारी उसी रेगुलेटेड संस्था के पास रहती है," उन्होंने कहा।

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वित्तीय संस्थान अपनी सेवाओं के विस्तार और ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए फिनटेक पार्टनरशिप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अंडरराइटिंग और ऑटोमेटेड प्रक्रियाओं का तेजी से उपयोग कर रहे हैं।

तकनीक और सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी

डिप्टी गवर्नर ने आगाह किया कि हालांकि तकनीक लागत कम करने और सेवाओं को तेज करने में मदद कर सकती है, लेकिन बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस प्रक्रिया में सुरक्षा के उपाय कमजोर न पड़ें। उन्होंने एक बहुत ही गहरी बात कही कि वित्तीय क्षेत्र में हर 'घर्षण' (Friction) अक्षमता नहीं होती।

उनके अनुसार, कुछ प्रक्रियाएं नियंत्रण बनाए रखने के लिए अनिवार्य होती हैं। उन्होंने समझाया कि:

  • स्वतंत्र सत्यापन (Independent verification) और अतिरिक्त जांच धोखाधड़ी और गलत ऋण निर्णयों को रोकने में मदद करते हैं।
  • लेनदेन को धीमा करने वाली कुछ प्रक्रियाएं वास्तव में एक महत्वपूर्ण 'कंट्रोल फंक्शन' के रूप में काम करती हैं।
  • अगर मैनुअल चेक की जगह एल्गोरिदम लाया जाता है, तो जोखिम खत्म नहीं होता; बल्कि नियंत्रण के तरीके को बदलना पड़ता है।

रफ्तार के चक्कर में नियंत्रण न खोएं

स्वामिनाथन जे ने सवाल उठाया कि जब भी सुविधा या रफ्तार के नाम पर किसी प्रक्रिया को हटाया या बदला जाता है, तो बैंकों को यह सोचना चाहिए कि वह कदम किस जोखिम को नियंत्रित कर रहा था और अब वह नियंत्रण कहां है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसका जवाब स्पष्ट नहीं है, तो प्रक्रिया का सरलीकरण वास्तव में नियंत्रण का कमजोर होना (Control Dilution) हो सकता है।

सिस्टम पर भरोसे का संकट

उन्होंने आंतरिक नियंत्रण में कमजोरी के व्यापक परिणामों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि धोखाधड़ी में कई संस्थाएं शामिल हैं, तो ग्राहकों के लिए यह समझना मुश्किल होता है कि पैसा किस संस्था के माध्यम से गया या कहां पहुंचा। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिस्टम के एक हिस्से में कमजोर नियंत्रण पूरे वित्तीय तंत्र के भरोसे को नुकसान पहुंचा सकता है।

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