आरबीआई का नया डेटा सेंटर: अब RTGS और NEFT होंगे और भी सुरक्षित
भुवनेश्वर में आरबीआई के नए डेटा सेंटर का उद्घाटन हुआ। इससे RTGS और NEFT जैसे पेमेंट सिस्टम की सुरक्षा और क्षमता बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भुवनेश्वर में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का भव्य उद्घाटन किया है। इस महत्वपूर्ण कदम से भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे, विशेष रूप से RTGS और NEFT जैसी प्रणालियों को एक अभेद्य सुरक्षा कवच और जबरदस्त मजबूती मिलने वाली है।
भुवनेश्वर में मजबूत होगा डिजिटल भुगतान का आधार
इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आरबीआई का यह नया डेटा सेंटर देश के भीतर महत्वपूर्ण भुगतान प्रणालियों के लिए बुनियादी ढांचे की क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह परिसर उन प्रणालियों के केंद्र में काम करेगा जो हमारे देश के बैंकिंग और भुगतान तंत्र की रीढ़ हैं।
वित्त मंत्री ने सरकार के प्रयासों को साझा करते हुए बताया कि 2022 में डेटा केंद्रों को 'इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस' प्रदान किया गया था। इसके अलावा, Union Budget 2026-27 में एक बड़ा कदम उठाते हुए, भारत में वैश्विक क्लाउड सेवाएं प्रदान करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए टैक्स हॉलिडे की भी घोषणा की गई है, ताकि देश में डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
UPI की सफलता: 13,000 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि
भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की ताकत का जिक्र करते हुए सीतारमण ने बताया कि UPI आज दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम पेमेंट प्रणाली बन चुका है। उन्होंने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए:
- 2016-17 के बाद से UPI के वार्षिक लेनदेन में लगभग 13,000 गुना की वृद्धि हुई है।
- वर्तमान में, एक महीने में 2,400 करोड़ से अधिक लेनदेन किए जा रहे हैं।
- इसका मतलब है कि भारत में हर दिन लगभग 80 करोड़ ट्रांजैक्शन हो रहे हैं।
साइबर सुरक्षा और भविष्य की तकनीक पर विशेष ध्यान
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस नए केंद्र के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केंद्रीय बैंक की वित्तीय प्रणालियों की सुरक्षा और लचीलेपन (Resilience) को बढ़ाएगा। उन्होंने डिजिटल बैंकिंग में जनता के भरोसे पर जोर देते हुए कहा, "कोई भी प्रणाली जो सुरक्षित नहीं है, वह जनता का विश्वास नहीं जीत सकती।"
गवर्नर ने बताया कि आरबीआई ने आईटी गवर्नेंस, साइबर रेजिलिएंस और डिजिटल भुगतान सुरक्षा के लिए बेहद कड़े ढांचे लागू किए हैं। इसके साथ ही, नया प्रशिक्षण संस्थान बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के पेशेवरों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा। यह संस्थान मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्रदान करेगा:
- साइबर सुरक्षा (Cybersecurity)
- डेटा साइंस (Data Science)
- क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing)
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
आरबीआई अब जवाबदेही और निष्पक्षता के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को भी बढ़ावा दे रहा है, ताकि डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से वित्तीय जोखिमों की पहचान शुरुआती चरणों में ही की जा सके।