मंत्री रेखा आर्या ने पति पर दर्ज कराई FIR, हत्या की साजिश और धोखाधड़ी का आरोप

उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने अपने पति गिरधारी लाल साहू, जिन्हें पप्पू गिरधारी के नाम से भी जाना जाता है, के खिलाफ देहरादून के कैंट पुलिस स्टेशन में एक गंभीर एफआईआर दर्ज कराई है। मंत्री ने अपने पति पर हत्या की साजिश रचने, शारीरिक शोषण, धोखाधड़ी और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल जैसे बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120B, 323, 420, 467, 468, 471, 495, 498A, 504 और 506 के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
हत्या की साजिश और जान का खतरा
रेखा आर्या ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें हाल ही में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग प्राप्त हुई है। इस रिकॉर्डिंग में उनके पति गिरधारी लाल साहू कथित तौर पर एक महिला से बात करते हुए उसे मारने की साजिश रचते हुए सुनाई दे रहे हैं। मंत्री ने पुलिस को बताया कि उन्हें और उनके नाबालिग बच्चों को लगातार जान का खतरा बना हुआ है और उनके पति किसी भी समय कोई बड़ी अप्रिय घटना को अंजाम दे सकते हैं।
शादी के वक्त किया गया बड़ा धोखा
शिकायत में मंत्री ने यह भी खुलासा किया कि उनके पति ने शादी के समय उनसे झूठ बोला था। रेखा आर्या के अनुसार, गिरधारी लाल साहू ने दावा किया था कि वह अविवाहित हैं। हालांकि, शादी के कुछ वर्षों बाद उन्हें पता चला कि वह पहले से विवाहित थे और उनकी पिछली शादी से बच्चे भी हैं। मंत्री ने बताया कि उस समय उन्होंने बच्चों के भविष्य और परिवार की सलाह पर इस बात पर चुप्पी साध ली थी।
मारपीट और जातिसूचक अपमान
मंत्री ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों में उनके पति का व्यवहार बदल गया है और उन्हें उनके अवैध संबंधों के बारे में पता चला। जब उन्होंने इन संबंधों का विरोध किया, तो उनके पति ने पहले लिखित और मौखिक रूप से माफी मांगी, लेकिन बाद में वही व्यवहार जारी रखा।
रेखा आर्या ने आगे आरोप लगाया कि:
- विरोध करने पर उनके पति ने उनके साथ शारीरिक मारपीट की और उन्हें जान से मारने की धमकी दी।
- उनके आधिकारिक निवास पर मौजूद कर्मचारियों के सामने भी उन्होंने मंत्री के साथ जातिसूचक अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया।
दस्तावेजों में जालसाजी का आरोप
मंत्री ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पति ने जालसाजी कर फर्जी दस्तावेजों और हस्ताक्षरों का उपयोग किया है। आरोप है कि गिरधारी लाल साहू ने उन्हें संबंधित कंपनियों के निदेशक (Director) के पद से हटा दिया है। रेखा आर्या ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने न तो किसी ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं और न ही अपना इस्तीफा दिया है।