तुम्मिडीहट्टी बैराज: सीएम रेवंत रेड्डी ने फडणवीस से की मुलाकात, 152 मीटर ऊंचाई का प्रस्ताव रखा
तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने महाराष्ट्र के फडणवीस से तुम्मिडीहट्टी बैराज की ऊंचाई 152 मीटर करने के प्रस्ताव पर चर्चा की।

मुंबई के सह्याद्रि स्टेट गेस्ट हाउस में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा तेलंगाना और महाराष्ट्र की सीमा पर प्राणहिता नदी पर प्रस्तावित तुम्मिडीहट्टी बैराज (Tummidihatti Barrage) का निर्माण और इसकी तकनीकी बारीकियों पर चर्चा करना था।
बैराज की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव
बैठक के दौरान तेलंगाना की ओर से बैराज की ऊंचाई को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव रखा गया। तेलंगाना के सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने विस्तार से बताया कि 2016 के समझौते में बैराज की ऊंचाई 148 मीटर तय की गई थी, लेकिन यह क्षेत्र की सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
वर्तमान चुनौतियों जैसे ऊर्जा की बढ़ती लागत, पर्यावरणीय चिंताएं और जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए, तेलंगाना सरकार ने बैराज की ऊंचाई को 152 मीटर करने का सुझाव दिया है। मंत्री ने तर्क दिया कि इस ऊंचाई से पानी को गुरुत्वाकर्षण (gravity) के माध्यम से पहुँचाना अधिक आसान और टिकाऊ होगा, जिससे परिचालन लागत में भी कमी आएगी।
आदिवासी समुदायों का विकास और ऐतिहासिक संदर्भ
सिंचाई मंत्री ने आदिलाबाद क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बावजूद, यह क्षेत्र दशकों से आर्थिक रूप से पिछड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी और जनजातीय समुदायों को विकास के अवसरों से वंचित रखा गया है, जिससे क्षेत्र में नक्सलवाद जैसी चुनौतियां भी पैदा हुईं।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने आदिवासी नेता कोमाराम भीम के ऐतिहासिक 'जल, जंगल, जमीन' संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि यह बैराज केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं है, बल्कि इस उपेक्षित क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक कायाकल्प का एक सशक्त माध्यम बनेगा।
मुआवजा और भविष्य की रणनीतिक संभावनाएं
बैराज निर्माण के कारण महाराष्ट्र के किसानों की भूमि के डूबने की संभावना पर चर्चा करते हुए, तेलंगाना सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाया है। तेलंगाना ने आश्वासन दिया है कि यदि महाराष्ट्र के किसानों की कृषि भूमि प्रभावित होती है, तो उन्हें महाराष्ट्र की भूमि अधिग्रहण नीतियों और दिशा-निर्देशों के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इस परियोजना के रणनीतिक महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आदिलाबाद में प्रस्तावित रक्षा और नागरिक हवाई अड्डा सुविधाएं न केवल तेलंगाना बल्कि महाराष्ट्र के पड़ोसी क्षेत्रों के विकास में भी बड़ी भूमिका निभाएंगी। उन्होंने इस बैराज को दोनों राज्यों के बीच एक 'भौतिक पुल' के रूप में देखा, जो कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेगा।