रिविलगंज में हनुमान जी को माना जाता है 'भगिना', 2063 तक बुकिंग!

बिहार के सारण में हनुमान जी को परिवार का सदस्य मानकर पूजा जाता है। यहाँ की परंपरा और अटूट आस्था की पूरी कहानी।

Ghazala Saheb29 October 20262 min read0 viewsBihar
रिविलगंज में हनुमान जी को माना जाता है 'भगिना', 2063 तक बुकिंग!

बिहार के सारण जिले का रिविलगंज प्रखंड अपनी अनूठी और विलक्षण परंपराओं के लिए पूरे देश में एक विशेष पहचान रखता है। यहाँ शारदीय नवरात्र के समापन के तुरंत बाद मूर्तियों का विसर्जन नहीं किया जाता, बल्कि एक विशेष परंपरा का पालन करते हुए पूर्णिमा के बाद कार्तिक मास में शुभ मुहूर्त में बजरंगबली की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।

ननिहाल मानकर की जाती है बजरंगबली की आराधना

इस अनोखी परंपरा के पीछे एक गहरा पौराणिक और लोकमान्यता से जुड़ा इतिहास है। माना जाता है कि इस पावन भूमि पर महर्षि गौतम का आश्रम स्थित था। लोक मान्यताओं के अनुसार, भगवान हनुमान जी माता अंजनी, महर्षि गौतम और माता अहिल्या की पुत्री थे। इसी कारण इस क्षेत्र को भगवान बजरंगबली का ननिहाल माना जाता है।

यही कारण है कि रिविलगंज के लोग हनुमान जी को केवल एक आराध्य देव के रूप में ही नहीं, बल्कि अपने परिवार के एक सदस्य, यानी अपने 'भगिना' (भांजे) के रूप में देखते हैं और उनकी सेवा करते हैं।

भव्य शोभायात्रा और पारंपरिक युद्ध कौशल का प्रदर्शन

दशहरा के बाद यहाँ एक विशाल शोभायात्रा निकाली जाती है, जो पूरे राज्य में विख्यात है। इस दौरान बजरंगबली रथ पर सवार होकर घर-घर पहुँचते हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान को मेवा और मिष्ठान का भोग लगाते हैं, उनकी आरती उतारते हैं और अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना के साथ उन्हें विदाई देते हैं।

इस शोभायात्रा के दौरान कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान देने योग्य हैं:

  • सड़क मार्ग पर प्रभाव: रिविलगंज से मांझी जाने वाला मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग 30 पर बड़े वाहनों के लिए लगभग 36 घंटे तक बंद रहता है।
  • अखाड़ों का प्रदर्शन: लगभग 12 प्रमुख अखाड़ों के माध्यम से निकलने वाली इस यात्रा में युवा पारंपरिक युद्ध कौशल का अद्भुत प्रदर्शन करते हैं।

अटूट आस्था: 2063 तक एडवांस बुकिंग

यहाँ की धार्मिक आस्था का आलम यह है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ-साथ स्थानीय लोगों के बीच इतनी अधिक मांग है कि प्रतिमा स्थापना और पूजा के लिए वर्ष 2063 तक की एडवांस बुकिंग पहले ही हो चुकी है।

इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को 10 किलोमीटर के दायरे में लगने वाला प्रसिद्ध गोदना सिमरिया राजकीय मेला और भी मजबूती प्रदान करता है।

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