पूर्व सांसद आर.के. सिन्हा का निधन, छपरा में शोक की लहर
एसआईएस समूह के संस्थापक और पूर्व भाजपा सांसद डॉ. आर.के. सिन्हा का निधन। छपरा के राजनीतिक और कारोबारी जगत में शोक की लहर।

भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य, भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद और दिग्गज उद्योगपति डॉ. आर.के. सिन्हा का शुक्रवार को नोएडा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही बिहार के राजनीतिक, सामाजिक और कारोबारी जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
एसआईएस समूह के संस्थापक और रोजगार के प्रदाता
डॉ. आर.के. सिन्हा केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी उद्योगपति भी थे। उन्होंने एसआईएस (SIS) समूह की स्थापना कर बिहार सहित पूरे देश के हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोले। उनके द्वारा किए गए इस योगदान ने अनगिनत परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सार्वजनिक जीवन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में उनका यह बहुमूल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
राजनीतिक जगत में अपूरणीय क्षति
डॉ. सिन्हा का राजनीतिक सफर भारतीय जनसंघ से शुरू हुआ था। उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए भाजपा के नेताओं ने इसे एक युग का अंत बताया है।
"डॉ. सिन्हा के जाने से सामाजिक, राजनीतिक और औद्योगिक जगत को एक ऐसी क्षति हुई है जिसकी भरपाई असंभव है। उन्होंने जिस निष्ठा से संगठन को सींचा, वह सदैव याद रखा जाएगा।"
भाजपा जिला अध्यक्ष रणजीत कुमार सिंह और प्रवक्ता अधिवक्ता प्रकाश रंजन नीकू ने संयुक्त रूप से कहा कि डॉ. सिन्हा के प्रस्थान से सामाजिक, राजनीतिक एवं औद्योगिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। वहीं, पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष रामदयाल शर्मा ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय जनसंघ, भाजपा एवं कई अन्य संगठनों को उन्होंने जिस निष्ठा से सींचा, उसकी भरपाई असंभव है।
शोक में डूबा छपरा और बिहार
उनके निधन पर छपरा और आसपास के क्षेत्रों के गणमान्य लोगों ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। शोक व्यक्त करने वालों में प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- सुरभित दत्त सिन्हा (संस्कार भारती, उत्तर बिहार महामंत्री)
- धनंजय श्रीवास्तव (ऑटोमोबाइल उद्योगपति)
- राजेश चंद्र मिश्रा (आरएसएस पूर्व प्रचारक)
- पवन कुमार श्रीवास्तव, दुर्गेश बिहारी, मुकेश कुमार वर्मा
- चंद्रशेखर जायसवाल, शैलेंद्र कुमार सिंह, अजय राम और अन्य
डॉ. सिन्हा का जाना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि बिहार के औद्योगिक और राजनीतिक इतिहास के लिए भी एक बड़ी क्षति है।