रुईधासा महाकाल मंदिर में शारदीय नवरात्र शुरू, मां शैलपुत्री की पूजा

किशनगंज के रुईधासा स्थित महाकाल मंदिर में रविवार को भक्ति और उत्साह के साथ शारदीय नवरात्र का शुभारंभ हुआ। मंदिर परिसर में कलश स्थापना के साथ ही नौ दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत की गई। नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई कलश स्थापना
मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। मंदिर के पुरोहित गुरु साकेत ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच घटस्थापना संपन्न कराई। उन्होंने बताया कि शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के साथ ही श्रद्धालु नौ दिनों तक चलने वाले व्रत और पूजा का संकल्प लेते हैं। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ मां दुर्गा के साथ-साथ महाकाल बाबा की भी विशेष पूजा की जाती है।
कौन हैं मां शैलपुत्री?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री को मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप माना जाता है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। उनके स्वरूप और महत्व के बारे में कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- वाहन: मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ है, जिस कारण उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है।
- स्वरूप: माता अपने दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण करती हैं।
- अन्य नाम: उन्हें पार्वती और हेमवती के नाम से भी जाना जाता है।