डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को मिले भारत रत्न, महाराष्ट्र में उठेगी मांग
ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस महाराष्ट्र में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को भारत रत्न देने की मांग के लिए औपचारिक प्रस्ताव पारित करेगी।

बिहार के निर्माता कहे जाने वाले डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजने की मांग अब तेज हो गई है। ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस ने इस दिशा में एक बड़ा अभियान शुरू किया है, जिसके तहत महाराष्ट्र में एक विशाल सम्मेलन आयोजित किया जाएगा ताकि उनकी ऐतिहासिक सेवाओं को मान्यता दिलाई जा सके।
बिहार के निर्माण में अतुलनीय योगदान
ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस के महाराष्ट्र समन्वयक के अनुसार, डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा का बिहार के निर्माण में योगदान बेमिसाल है। उन्होंने बंगाल से बिहार को अलग करने की प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि, यह चिंता जताई गई है कि जिस व्यक्तित्व ने पूरे राष्ट्र और विशेषकर बिहार के लिए काम किया, उन्हें वह सम्मान नहीं मिल सका जिसके वे हकदार थे।
समन्वयक ने कहा कि एक समय था जब डॉ. सिन्हा का इतिहास स्कूल और कॉलेज की पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा हुआ करता था, लेकिन अब धीरे-धीरे उनके योगदान को भुलाया जा रहा है। यह स्थिति समाज के लिए अत्यंत पीड़ादायक है। सरकार द्वारा उन्हें उचित मरणोपरांत सम्मान न दिए जाने की भावना को पूरे बिहार में साझा किया जा रहा है।
20 दिसंबर को महाराष्ट्र में महासम्मेलन
इस मांग को और मजबूती देने के लिए 20 दिसंबर को महाराष्ट्र में ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस का एक विशाल सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इस कार्यक्रम के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी नीचे दी गई है:
- इस सम्मेलन में भारत और विदेशों से हजारों प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।
- सम्मेलन के दौरान डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को भारत रत्न देने की मांग का एक औपचारिक प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
- यह मुद्दा संगठन के राष्ट्रीय मंच पर भी उठाया गया है, जिसे व्यापक समर्थन मिल रहा है।
प्रधानमंत्री और सरकार से विशेष अपील
संगठन ने डॉ. सिन्हा के ऐतिहासिक योगदान को स्वीकार करने के लिए देश के शीर्ष नेतृत्व से गुहार लगाई है। उन्होंने निम्नलिखित नेताओं से डॉ. सिन्हा को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करने का आग्रह किया है:
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी
- भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन
समन्वयक का मानना है कि यदि डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को यह सम्मान दिया जाता है, तो यह न केवल बिहार के गौरवशाली इतिहास को सम्मान देगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करेगा।