सहरसा: मंडन मिश्र सरोवर में मां गंगा की भव्य आरती, भक्तिमय हुआ माहौल
सहरसा के भारती मंडन मिश्र सरोवर में गंगा उत्सव-2026 के तहत मां गंगा की भव्य आरती की गई। वैदिक मंत्रोच्चारण से वातावरण भक्तिमय हो गया।

बिहार के सहरसा जिले में गंगा उत्सव-2026 के अवसर पर एक अद्भुत आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला। न्यू कॉलोनी स्थित भारती मंडन मिश्र सरोवर में जिला गंगा समिति, सहरसा के तत्वावधान में मां गंगा की भव्य आरती का आयोजन किया गया। इस दौरान पूरा सरोवर परिसर दीपों की जगमगाहट, शंखनाद और भक्तिमय संगीत से सराबोर होकर एक अलौकिक छटा बिखेरने लगा।
वैदिक मंत्रों से गुंजायमान हुआ सरोवर परिसर
आरती की इस भव्यता में एक विशेष आकर्षण श्रीउग्रतारा वेद विद्यालय, महिषी के नन्हे वेदपाठी बच्चों का रहा। इन बच्चों द्वारा किए गए सस्वर वैदिक मंत्रों के उच्चारण ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ इस आरती में भाग लिया और समाज की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।
क्या है गंगा उत्सव और इसका उद्देश्य?
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार) के निर्देशानुसार, गंगा नदी को भारत की राष्ट्रीय नदी घोषित किए जाने के बाद हर साल 4 नवंबर को गंगा उत्सव मनाया जाता है।
- आयोजन का पैमाना: वर्ष 2026 में गंगा बेसिन के पांच राज्यों की 139 जिला गंगा समितियों के माध्यम से यह उत्सव मनाया जा रहा है।
- बिहार की भागीदारी: इस बड़े आयोजन में बिहार राज्य की 38 जिला गंगा समितियां सक्रिय रूप से शामिल हैं।
- मुख्य लक्ष्य: गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण, स्वच्छता और निर्मलता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना।
नदियों का संरक्षण: एक सामूहिक जिम्मेदारी
कार्यक्रम के दौरान गंगा नदी के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। यह स्पष्ट किया गया कि गंगा उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह नदियों को बचाने का एक महत्वपूर्ण अभियान है।
"गंगा नदी भारतीय सभ्यता और संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है। इसका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।"
इस अवसर पर आम नागरिकों से अपील की गई कि वे गंगा सहित अपनी स्थानीय नदियों, तालाबों, पोखरों और अन्य जल स्रोतों को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त रखने में सक्रिय योगदान दें। जल संरक्षण और स्वच्छता को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाना ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल संसाधनों को सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है।