सहरसा में अल्पसंख्यक अधिकार मंच का धरना, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

सहरसा में अल्पसंख्यक अधिकार मंच के राज्यव्यापी आह्वान पर सहरसा स्टेडियम के बाहरी हिस्से में अल्पसंख्यकों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एक दिवसीय धरना दिया। अल्पसंख्यक अधिकार मंच के संयोजक मोहम्मद तौहीद आलम की अध्यक्षता में यह धरना आयोजित किया गया। अल्पसंख्यक अधिकार मंच के नेता नसीमुद्दीन ने केंद्र और राज्य सरकार पर अल्पसंख्यकों के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया।
धरना को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि सरकारें संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों को खत्म कर रही हैं और भेदभाव कर रही हैं। वक्फ कानून में संशोधन कर अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय किया जा रहा है। सच्चर एवं रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। अल्पसंख्यकों के नाम पर नफरत फैलाई जा रही है और बहुसंख्यक व अल्पसंख्यक के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेकी जा रही हैं।
अन्य वक्ताओं ने सरकार के दोहरे मापदंड और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर रोज नए हमलों की निंदा की। सांप्रदायिक, भड़काऊ और कौमी एकता को खंडित करने वाले भाषणों पर रोक लगाने की मांग की गई। वक्ताओं ने मदरसों में आधुनिक, तकनीकी और रोजगारोन्मुखी शिक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग भी की।
सीपीएम जिला सचिव कॉ. रणधीर यादव ने धरना का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारें जनता की मूलभूत समस्याओं की अनदेखी कर धर्म और मजहब की राजनीति कर रही हैं। महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से आमजन त्राहिमाम है। देश में हिंदू-मुस्लिम और मंदिर-मस्जिद का उन्माद पैदा कर राजनीति की जा रही है जो एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के लिए अच्छा नहीं है।
धरना को कई अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया। सभा के अंत में एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी 13 सूत्री मांगों का ज्ञापन जिला पदाधिकारी सहरसा को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।