किशंगंज: 'सखी वार्ता' से महिलाओं को मिला अधिकारों का मंत्र

किशंगंज में 'सखी वार्ता' कार्यक्रम के जरिए महिलाओं और किशोरियों को उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं और सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।

Ghazala Saheb7 November 20262 min read0 viewsBihar
किशंगंज: 'सखी वार्ता' से महिलाओं को मिला अधिकारों का मंत्र

किशंगंज जिले के छगलिया स्थित आंगनवाड़ी केंद्र संख्या 12 में शनिवार को 'सखी वार्ता' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना के तहत आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों को शिक्षित करना, उन्हें सशक्त बनाना और आत्मनिर्भरता की राह दिखाना था। इस कार्यक्रम में स्थानीय महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि: जिलाधिकारी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और उनकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक विकसित और प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए महिलाओं का सशक्त होना अनिवार्य है।

जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि प्रशासन महिलाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा, भेदभाव या शोषण को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा कि जिले की प्रत्येक महिला को उनके कानूनी अधिकारों और सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता सेवाओं की पूरी जानकारी हो।

सरकारी योजनाओं तक पहुंच बनाना है मुख्य लक्ष्य

ICDS की जिला कार्यक्रम अधिकारी और महिला एवं बाल विकास निगम की नोडल अधिकारी वंदना पांडे ने इस बात पर बल दिया कि ऐसे कार्यक्रमों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से ही सरकारी योजनाएं समाज के सबसे वंचित और हाशिए पर खड़े लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंच पाती हैं। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे सरकार द्वारा दी जा रही विभिन्न सुविधाओं का लाभ उठाएं।

जिला मिशन समन्वयक मोहम्मद शहबाज आलम ने केंद्र और बिहार सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने समाज के समग्र विकास के लिए शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन को आवश्यक बताया।

इन गंभीर सामाजिक मुद्दों पर हुई चर्चा

सखी वार्ता के दौरान समाज में व्याप्त कई ज्वलंत और गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई, ताकि महिलाएं इनके प्रति जागरूक हो सकें। चर्चा के मुख्य विषय निम्नलिखित थे:

  • बाल विवाह की रोकथाम
  • घरेलू हिंसा से बचाव
  • दहेज उत्पीड़न के खिलाफ आवाज
  • कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न
  • मानव तस्करी का खतरा
  • लैंगिक आधारित हिंसा

विशेषज्ञों ने दी सहायता और अधिकारों की जानकारी

कार्यक्रम में मौजूद जेंडर विशेषज्ञों सुशील कुमार झा और चमन आरा ने महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति सचेत किया। वहीं, वन स्टॉप सेंटर की केस वर्कर देविका कुमारी ने सरकारी सहायता सेवाओं और शिकायत निवारण के तरीकों के बारे में बताया। इसके अतिरिक्त, महिला पर्यवेक्षक वाणी झा ने शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, सही पोषण और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के अंत में, ग्रामीण महिलाओं ने इस पहल की सराहना की। महिलाओं ने प्रशासन से अनुरोध किया कि उन्हें उनके अधिकारों और सरकारी कार्यक्रमों से अपडेट रखने के लिए इस तरह के जागरूकता सत्र नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए।

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