सम्राट चौधरी ने रक्षाबंधन पर बिहार की महिलाओं के लिए शुरू की तीन नई योजनाएं

रक्षाबंधन के अवसर पर बिहार की बेटियों और बहनों के सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा, सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को तीन महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत की। पटना के ज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पुलिस दीदी (अभया ब्रिगेड) के लिए 4,700 दोपहिया वाहनों का लोकार्पण किया और उन्हें हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान महिला पुलिसकर्मियों ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी।
पुलिस दीदी योजना और 4700 वाहन
मुख्यमंत्री ने पुलिस दीदी (अभया ब्रिगेड) के लिए 4,700 स्कूटर और मोटरसाइकिल का लोकार्पण करते हुए कहा कि इन वाहनों से महिला पुलिसकर्मी स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं की सुरक्षा और संरक्षण के साथ महिला सुरक्षा से जुड़े कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि बिहार पुलिस में करीब 40 हजार महिला पुलिसकर्मी कार्यरत हैं। देश के किसी भी राज्य के पुलिस बल में महिला पुलिसकर्मियों की इतनी बड़ी संख्या नहीं है। आपातकालीन सेवा 112 का रिस्पॉन्स टाइम अब 10 मिनट से कम हो गया है और इसे घटाकर पांच से सात मिनट से भी कम करने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप
कार्यक्रम के दौरान सम्राट चौधरी ने 'मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप' योजना का भी शुभारंभ किया। इसके तहत करीब 1,000 छात्राओं को चार वर्षों तक हर महीने 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। बेटियों को उच्च शिक्षा और शोध के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
बिहार की बेटी स्टार्टअप चैलेंज योजना
मुख्यमंत्री ने 'बिहार की बेटी स्टार्टअप चैलेंज योजना' की भी शुरुआत की। इसके तहत महिला उद्यमियों को अपने नवाचार और उद्यम को आगे बढ़ाने के लिए 50 हजार से दो लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इस योजना से 2,100 महिलाओं को लाभ मिलने की बात कही गई है।
जीविका दीदियां और अन्य योजनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था में जीविका दीदियों की महत्वपूर्ण भूमिका है और राज्य की करीब 43 लाख जीविका दीदियां लखपति दीदी बन चुकी हैं। जीविका दीदियों का अर्थव्यवस्था में करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये का योगदान है। आने वाले वर्षों में एक करोड़ और जीविका दीदियों को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। पंचायतों और नगर निकायों के चुनाव में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है और करीब 59 प्रतिशत महिलाएं जनप्रतिनिधि के रूप में चुनकर आ रही हैं।