बिहार में संगठित अपराध का दौर खत्म, जेडीयू नेता संजय झा का बड़ा दावा

जेडीयू नेता संजय झा ने कहा कि बिहार में संगठित अपराध और गैंग का दौर खत्म हो चुका है। एनडीए सरकार ने अपराधियों को जेल भेज दिया है।

Ghazala Saheb4 November 20262 min read0 viewsBihar
बिहार में संगठित अपराध का दौर खत्म, जेडीयू नेता संजय झा का बड़ा दावा

कटिहार में आयोजित 'नीतीश संवाद' कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार में संगठित अपराध और आपराधिक गिरोहों का युग पूरी तरह से समाप्त हो चुका है।

अपराधियों के सिंडिकेट पर प्रहार

संजय झा ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हालिया बयान का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने राज्य में सक्रिय आपराधिक गिरोहों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है और अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सम्राट चौधरी के बयान का मुख्य लक्ष्य संगठित अपराध को निशाना बनाना था। हालांकि व्यक्तिगत स्तर पर कुछ घटनाएं हो सकती हैं, लेकिन अब सरकार को चुनौती देने वाले किसी भी संगठित सिंडिकेट का खुलेआम संचालन बिहार में संभव नहीं है।

उल्लेखनीय है कि 'नीतीश संवाद' कार्यक्रम की शुरुआत बक्सर से हुई थी, जिसका समापन कटिहार में हुआ। इस दौरान संजय झा के साथ जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा भी मौजूद रहे और उन्होंने स्थानीय युवाओं के लिए आयोजित मैराथन दौड़ में भी हिस्सा लिया।

राजनीतिक संरक्षण का अंत

संजय झा ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि अब अपराधियों को कोई राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलता है। उन्होंने कहा, "पहले के दौर में अपराधी खुद को राजनीतिक चेहरा बताकर पेश करते थे, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में इन समूहों को पूरी तरह से बेअसर कर दिया गया है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान प्रशासन अपराधियों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करता है।

फरक्का जल संधि: 13 करोड़ लोगों का मुद्दा

कार्यक्रम के दौरान संजय झा ने फरक्का जल संधि के विषय पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि बिहार की 13 करोड़ आबादी से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गंगा के पानी का उचित और न्यायपूर्ण हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए संधि का नवीनीकरण और उसमें सुधार करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे बिहार के 12 जिले सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं।

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