जेपी के 'संपूर्ण क्रांति' के संदेश को अपनाने की जरूरत: संजय सरावगी

पटना में स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी चिंतक और 'सम्पूर्ण क्रांति' के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि पर आयोजित राजकीय समारोह में उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उनके जीवन और संघर्षों को याद करते हुए समाज को नई दिशा देने का आह्वान किया।
समारोह के दौरान संजय सरावगी ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ मिलकर जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उन्हें नमन किया।
लोकतंत्र और जनसेवा के प्रतीक थे जेपी
संजय सरावगी ने अपने संबोधन में कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण का संपूर्ण जीवन राष्ट्र, लोकतंत्र और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के अधिकारों के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर लोकतंत्र की रक्षा के संघर्ष तक, जेपी ने अपने विचारों और सिद्धांतों से देश को एक नई राह दिखाई।
"उनका जीवन त्याग, संघर्ष, सादगी और जनसेवा का एक महान प्रतीक है," सरावगी ने कहा। उन्होंने आगे विस्तार से बताया कि जयप्रकाश नारायण ने राजनीति को सत्ता हासिल करने का साधन नहीं, बल्कि जनसेवा का एक माध्यम माना। उन्होंने अन्याय, भ्रष्टाचार और निरंकुशता के खिलाफ आवाज उठाते हुए देश के युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी थी।
'संपूर्ण क्रांति' का व्यापक दृष्टिकोण
संजय सरावगी ने जेपी के 'सम्पूर्ण क्रांति' के आह्वान पर चर्चा करते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक परिवर्तन तक सीमित नहीं था। वास्तव में, यह सामाजिक, आर्थिक और नैतिक परिवर्तन की एक व्यापक परिकल्पना थी, जिसका उद्देश्य समाज के हर स्तर पर सुधार लाना था।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि आज के समय में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती, सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता दिखाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
युवाओं के लिए प्रेरणा का मार्ग
सरावगी ने नई पीढ़ी, विशेषकर युवाओं से अपील की कि उन्हें जयप्रकाश नारायण के संघर्षों, विचारों और आदर्शों से परिचित होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को जेपी के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने अंत में यह संदेश दिया कि लोकनायक का जीवन हमें सिखाता है कि जब भी लोकतांत्रिक मूल्यों और जन अधिकारों पर संकट आए, तब समाज के प्रत्येक वर्ग को सजग होकर अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उनके विचार और आदर्श सदैव देश और समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे।