रामायण मर्यादा और सामाजिक समरसता का संदेश: संजय सरावगी

पटना में आयोजित 'वाल्मीकि के राम' कार्यक्रम में भाजपा नेता संजय सरावगी ने महर्षि वाल्मीकि और रामायण के शाश्वत संदेशों पर प्रकाश डाला।

Ghazala Saheb25 October 20262 min read0 viewsBihar
रामायण मर्यादा और सामाजिक समरसता का संदेश: संजय सरावगी

पटना के बाबू जगजीवन राम शोध संस्थान में रविवार को 'वाल्मीकि के राम' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। वाल्मीकि जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया और महर्षि वाल्मीकि के संदेश तथा उनकी कालजयी रचनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

रामायण: जीवन जीने की कला और आदर्श समाज का मार्ग

संजय सरावगी ने अपने संबोधन में कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, सभ्यता और नैतिक मूल्यों की एक अमूल्य धरोहर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह ग्रंथ हमें जीवन जीने की कला सिखाता है और एक आदर्श समाज की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करता है।

सरावगी के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि की रचनाएं समाज में मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने और लोगों को सदाचार के मार्ग पर चलने के लिए निरंतर प्रेरित करती रहती हैं।

मर्यादा, न्याय और करुणा का शाश्वत संदेश

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन पर चर्चा करते हुए कहा कि श्रीराम का चरित्र हमें कर्तव्यनिष्ठा, त्याग, सत्य और लोककल्याण की भावना का संदेश देता है।

"महर्षि वाल्मीकि की रामायण मर्यादा, न्याय, करुणा और सामाजिक समरसता का शाश्वत संदेश देती है, जो आज भी समाज को प्रेरित करती है।"

उन्होंने आगे कहा कि यदि हम रामायण के इन उच्च आदर्शों को अपने आचरण में उतार सकें, तो हम एक बेहतर, संवेदनशील और समरस समाज के निर्माण में अपना योगदान दे सकते हैं। महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को आत्मसात कर ही समाज में सद्भाव, समानता और परस्पर सम्मान की भावना को मजबूत किया जा सकता है।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य लोग

इस विशेष अवसर पर कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की, जिनमें शामिल हैं:

  • रमा निषाद (बिहार सरकार की मंत्री)
  • संजीव चौरसिया (मुख्य सचेतक)
  • राजेश वर्मा (भाजपा नेता)
  • राजेश कुमार वाल्मीकि उर्फ रमैया (कार्यक्रम के आयोजक)

इस आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे, जिन्होंने महर्षि वाल्मीकि के जीवन और उनके संदेशों को सुनने में गहरी रुचि दिखाई।

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