संस्कृत अतीत और वर्तमान को समझने का सशक्त माध्यम : प्रो. वारिक

Ghazala Saheb29 August 20262 min read17 viewsBihar
संस्कृत अतीत और वर्तमान को समझने का सशक्त माध्यम : प्रो. वारिक

संस्कृत विश्वविद्यालय में संस्कृत सप्ताह समारोह के पांचवें दिन ‘संस्कृतं विज्ञानं च’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। दरभंगा में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अध्यक्ष छात्र कल्याण प्रो. पुरेंद्र वारिक ने कहा कि संस्कृत अतीत के साथ-साथ वर्तमान को जानने और समझने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिक चिंतन एवं ज्ञान परंपराओं को समझने में भी संस्कृत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आधुनिक विज्ञान और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के बीच संवाद स्थापित कर नई पीढ़ी के लिए अनुसंधान के नए आयाम विकसित किए जा सकते हैं। पीआरओ डॉ. निशिकान्त ने बताया कि संगोष्ठी में वक्ताओं ने विज्ञान और संस्कृत के बीच संबंधों को अलग-अलग दृष्टिकोण से रेखांकित किया।

सारस्वत अतिथि प्रो. दयानाथ झा एवं मुख्य वक्ता डॉ. सोनूराम शंकर ने विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने संस्कृत शास्त्रों में वर्णित वैज्ञानिक तथ्यों को शास्त्रीय दृष्टि से प्रस्तुत करते हुए कहा कि संस्कृत और विज्ञान का संबंध केवल ऐतिहासिक गौरव तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के संदर्भ में भी इसका विशेष महत्व है।

संस्कृत की वैज्ञानिकता उसके सुव्यवस्थित व्याकरण, ध्वनि-विन्यास, शब्द-निर्माण और तार्किक वाक्य-विन्यास में दिखाई देती है। महर्षि पाणिनि की ‘अष्टाध्यायी’ में लगभग चार हजार सूत्रों के माध्यम से भाषा को व्यवस्थित नियमों में प्रस्तुत किया गया है। यही नियमबद्धता आज कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स के अध्ययन में विशेष रुचि का विषय बनी हुई है।

पाणिनीय व्याकरण और आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बीच संवाद शोध का उभरता हुआ क्षेत्र है। आयुर्वेद, गणित, ज्योतिष, खगोल, वास्तु, धातुविज्ञान, दर्शन और तर्कशास्त्र जैसे भारतीय ज्ञान-विषयों का विशाल साहित्य संस्कृत में उपलब्ध है। आवश्यकता इस ज्ञान-संपदा को आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति, डिजिटल तकनीक और अनुसंधान से जोड़ने की है।

उपकुलसचिव डॉ. नवीन कुमार झा ने कहा कि एआई, प्राकृतिक भाषा संस्करण (एनएलपी), मशीन अनुवाद, डिजिटल टेक्स्ट विश्लेषण और ज्ञान-प्रतिनिधित्व जैसे क्षेत्रों में संस्कृत अध्ययन की नई संभावनाएं सामने आई हैं।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अवधेश श्रोत्रिय ने किया, जबकि सत्र संयोजन डॉ. सविता आर्या ने किया। स्वागत भाषण साहित्य विभाग के सहायक प्राचार्य एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुधीर कुमार ने दिया। मौके पर वित्त पदाधिकारी डॉ. पवन कुमार झा सहित दर्जनों लोग मौजूद थे।

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