सारण में गंडक का तांडव: 48 गांव डूबे, NH-722 पर भी घुसा पानी

सारण जिले में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने भारी तबाही मचाई है। नदी के उफान के कारण जिले के पांच प्रमुख प्रखंडों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासन के अनुसार, पानापुर, तरैया, अमनौर, मकेर और परसा प्रखंड की 18 पंचायतों के 48 गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
इस प्राकृतिक आपदा से लगभग 24,725 की आबादी और करीब 4,220 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि बाढ़ का पानी अब राष्ट्रीय राजमार्ग 722 (NH-722) पर भी पहुंच गया है, जिससे यातायात ठप हो गया है और कई लोग बीच रास्ते में फंस गए हैं।
ग्राउंड जीरो पर पहुंचे डीएम और एसएसपी
हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और वरीय पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार ने स्वयं नाव के जरिए बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। अधिकारियों ने न केवल स्थिति का जायजा लिया, बल्कि पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के रेस्क्यू अभियान का नेतृत्व भी किया।
"हमारी प्राथमिकता हर प्रभावित व्यक्ति को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना और उन्हें तत्काल सहायता उपलब्ध कराना है।" - जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव
राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमें
बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए प्रशासन ने युद्धस्तर पर अभियान शुरू कर दिया है। राहत कार्यों के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएं की गई हैं:
- NDRF और SDRF: बचाव कार्य के लिए तीन विशेष टीमें तैनात की गई हैं।
- नौका सेवाएं: लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए 33 नावें और 1 बोट एंबुलेंस संचालित की जा रही है।
- चिकित्सा सुविधा: स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 5 चिकित्सा शिविर और मवेशियों के लिए पशु चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं।
- आश्रय और सामग्री: एक राहत केंद्र में 50 लोग रह रहे हैं, जबकि अब तक 950 पॉलीथिन शीट का वितरण किया जा चुका है।
भोजन के लिए सामुदायिक रसोई का सहारा
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भोजन की कमी न हो, इसके लिए पांचों प्रखंडों में कुल 14 सामुदायिक रसोई शुरू की गई हैं। इन रसोई के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 5,000 लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि जरूरत पड़ने पर इन रसोइयों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और नदी या तटबंध के संवेदनशील इलाकों से दूर रहें। जलस्तर में होने वाले बदलावों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।