सारण में जल-जीवन-हरियाली दिवस: पर्यावरण बचाने का संकल्प
सारण में जल-जीवन-हरियाली दिवस मनाया गया। डॉ. नीना झा ने जल संरक्षण और पौधरोपण के महत्व पर जोर दिया।

बिहार के सारण जिले में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिला जनसंपर्क कार्यालय, सारण के परिसर में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के तत्वावधान में 'जल-जीवन-हरियाली दिवस' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
जल और हरियाली ही जीवन का आधार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. नीना झा ने अभियान के उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मानव जीवन के अस्तित्व के लिए जल और हरियाली सबसे अनिवार्य तत्व हैं। उन्होंने पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष जोर दिया:
- जल संरक्षण: पानी की हर बूंद की कीमत समझना और उसे बचाना।
- वर्षा जल संचयन: बारिश के पानी को इकट्ठा करने की तकनीकों को अपनाना।
- पौधरोपण: अधिक से अधिक पेड़ लगाकर धरती को हरा-भरा बनाना।
डॉ. झा ने स्पष्ट किया कि यदि हमें आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित भविष्य देना है, तो इन प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी
इस अवसर पर कार्यक्रम में मौजूद कर्मियों और प्रतिभागियों ने भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपने विचार साझा किए। चर्चा के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती, बल्कि इसमें हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों से एक विशेष अपील की गई। लोगों से आग्रह किया गया कि वे न केवल जल की बर्बादी को रोकें, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को अपनी दैनिक दिनचर्या का एक अभिन्न हिस्सा बनाएं।