सारण की जीविका दीदियों का कमाल: 'वोकल फॉर लोकल' से बदली तकदीर

सारण जिले में जिला प्रशासन और जीविका के संयुक्त तत्वावधान में 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत एक बेहद खास कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिले के सभी 64 संकुल स्तरीय संघों में 'वोकल फॉर लोकल: मेरा उत्पाद, मेरी पहचान' कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस विशेष आयोजन में जीविका दीदियों ने अपनी उद्यमिता और हुनर का शानदार प्रदर्शन कर आत्मनिर्भरता की एक अनूठी मिसाल पेश की है।
प्रदर्शनी में स्वदेशी उत्पादों की धूम
कार्यक्रम की शुरुआत एक उत्साहपूर्ण प्रभात फेरी के साथ हुई, जिसने पूरे माहौल में जोश भर दिया। इसके बाद 'मेरा उत्पाद, मेरी पहचान' थीम पर आधारित संकुल स्तर पर प्रदर्शनियां लगाई गईं। इन प्रदर्शनियों में दीदियों द्वारा निर्मित दर्जनों स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, जिनमें शामिल थे:
- सत्तू और शुद्ध देशी घी
- अचार, पापड़ और मसाले
- मोमबत्ती और स्वेटर
- टमाटर सॉस
प्रतियोगिताओं के माध्यम से दीदियों ने अपनी रचनात्मकता भी दिखाई, जहाँ रंगोली और मेहंदी प्रतियोगिताओं ने सभी का मन मोह लिया।
छठ महापर्व के लिए विशेष तैयारी
आगामी छठ महापर्व को देखते हुए भी दीदियों ने विशेष तैयारी की है। प्रदर्शनी में विशेष रूप से तैयार किए गए सूप, टोकरी और अर्घ्य पात आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। इन उत्पादों ने स्थानीय कारीगरी और परंपरा को एक नया मंच प्रदान किया है।
सफलता की कहानियाँ: आत्मनिर्भरता की नई पहचान
जीविका दीदियों ने साझा किया कि सामुदायिक निधि और बैंक ऋण के सहयोग ने उन्हें न केवल आर्थिक मजबूती दी है, बल्कि समाज में एक नई पहचान भी दिलाई है। कुछ सफल उदाहरण इस प्रकार हैं:
दिघवारा की ललिता देवी अब सर्फ और अगरबत्ती बनाकर अपने परिवार को आर्थिक संबल दे रही हैं। वहीं, अमनौर की सुनंदा देवी पत्तल-ग्लास निर्माण के जरिए पूरी तरह स्वावलंबी बन चुकी हैं।
जिला परियोजना प्रबंधक ने इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि प्रशासन और जीविका के मजबूत समन्वय से सारण की दीदियां अब सफल उद्यमी बन चुकी हैं। ये महिलाएं न केवल अपने परिवार को संभाल रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बिहार के सपने को भी तेजी से साकार कर रही हैं।