सारण में ऋतुओं और त्योहारों के साथ बदलता है बाज़ार का रंग-रूप, हर मौसम में सजती हैं नई दुकानें

सारण में संस्कृति और परंपराओं की सबसे खूबसूरत झलक बाज़ारों में देखने को मिलती है। जैसे-जैसे ऋतुएँ बदलती हैं, त्योहारों का आगमन होता है और बाज़ारों का रंग-रूप पूरी तरह बदल जाता है। यह बदलता दृश्य आर्थिक गतिविधियों को गति देता है और लोक आस्था व जन-जीवन के गहरे जुड़ाव को उजागर करता है।
सावन से स्वतंत्रता दिवस तक का बाज़ार
सावन का महीना आते ही पूरा सारण केशरिया रंग में रंग जाता है। मुख्य बाज़ारों से लेकर गलियों की दुकानों तक भगवान भोलेनाथ की पूजन सामग्रियाँ, बेलपत्र, भांग और केसरिया वस्त्र छा जाते हैं। इसके बाद राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस पर हर दुकान तिरंगे की विविध कलाकृतियों, झंडों और सजावटी सामानों से सज उठती है।
राखी, जन्माष्टमी और नवरात्रि का उल्लास
भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक राखी का त्योहार आते ही बाज़ारों में रंग-बिरंगी राखियों और मिठाइयों की महक छा जाती है। जन्माष्टमी पर बाल-गोपाल के सुंदर वस्त्र, मुकुट, बांसुरी और श्रृंगार के सामान दिखते हैं, जबकि शारदीय नवरात्रि और दशहरा में माँ दुर्गा के पूजन-सामान से बाज़ार गुलज़ार रहते हैं।
धनतेरस, दीपावली और छठ महापर्व
धनतेरस और दीपावली पर इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, नए बर्तन, रंग-बिरंगे दीये, झालरें और सजावटी सामानों की भारी बिक्री होती है। इसके बाद बिहार के महापर्व छठ पर सूप, दउरा, फल, ठेकुआ सामग्री और गन्ने से पूरा शहर पटा रहता है। सारण का बाज़ार बदलते मौसम, उमंग और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का दर्पण है।