शारदीय नवरात्र 2026: 11 अक्टूबर को कलश स्थापना, 10 दिनों तक मनेगा महापर्व

इस वर्ष शारदीय नवरात्र का महापर्व 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू होने जा रहा है। ब्रज किशोर ज्योतिष संस्थान एवं फाउंडेशन के संस्थापक और प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा के अनुसार, इस बार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शक्ति की साधना और आराधना का समय शुरू हो जाएगा। इस वर्ष तिथियों के विस्तार के कारण यह महापर्व पूरे 10 दिनों तक चलेगा, जिसका समापन 21 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ होगा।
हाथी पर मां दुर्गा का आगमन, होगी भारी बारिश
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस वर्ष शारदीय नवरात्रि पर देवी दुर्गा का आगमन 'गजारुढ़या' यानी हाथी पर हो रहा है। शास्त्रों के अनुसार, जब भगवती हाथी की सवारी पर आती हैं, तो यह अत्यधिक वर्षा का संकेत माना जाता है। हालांकि, उनका प्रस्थान 'गजवाहनया' की सवारी के साथ होगा, जिसे बेहद शुभदायक और मंगलकारी माना जाता है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
मिथिला के विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग में संपन्न होगी। पंडित तरुण झा ने बताया कि कलश स्थापना के लिए सबसे उत्तम समय निम्नलिखित है:
- प्रातः काल: सुबह 10:35 बजे से पहले।
- अपराह्न काल: दोपहर 1:26 बजे के बाद।
चूंकि प्रतिपदा तिथि पूरे दिन उपलब्ध है, इसलिए श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार भी कलश स्थापना कर सकते हैं।
अष्टमी, नवमी और संधि पूजा का विशेष महत्व
इस वर्ष तिथियों के विशेष संयोग के कारण पूजा का क्रम इस प्रकार रहेगा:
- 18 अक्टूबर: महाअष्टमी का व्रत।
- 19 अक्टूबर: संधि पूजा (अष्टमी तिथि की समाप्ति और महानवमी का आरंभ)।
- 20 अक्टूबर: महानवमी का व्रत और त्रिशूलनी पूजा।
- 21 अक्टूबर: विजयादशमी, देवी विसर्जन और नवरात्र व्रत का पारण।
माता के नौ रूपों की पूजा का पूरा शेड्यूल
भक्तों की सुविधा के लिए नवरात्र के सभी दिनों का विवरण नीचे दिया गया है:
- 11 अक्टूबर (रविवार): शारदीय नवरात्र प्रारंभ, कलश स्थापना और माँ शैलपुत्री दर्शन।
- 12 अक्टूबर (सोमवार): माँ ब्रह्मचारिणी देवी दर्शन।
- 13 अक्टूबर (मंगलवार): माँ चंद्रघंटा देवी दर्शन।
- 14 अक्टूबर (बुधवार): माँ कूष्मांडा देवी दर्शन एवं श्री गणेश पूजन।
- 15 अक्टूबर (गुरुवार): माँ स्कन्दमाता दर्शन।
- 16 अक्टूबर (शुक्रवार): माँ कात्यायनी देवी दर्शन एवं गज पूजा।
- 17 अक्टूबर (शनिवार): महा सप्तमी, नव पत्रिका प्रवेश और सरस्वती पूजा का आरम्भ।
- 18 अक्टूबर (रविवार): महाअष्टमी व्रत और रात्रि जागरण।
- 19 अक्टूबर (सोमवार): संधि पूजा।
- 20 अक्टूबर (मंगलवार): महानवमी व्रत, माँ महागौरी दर्शन और त्रिशूलनी पूजा हवन।
- 21 अक्टूबर (बुधवार): विजयादशमी, देवी विसर्जन, अपराजिता पूजा और नीलकंठ दर्शन।