BRICS संसदीय मंच: शशि थरूर को कल संयुक्त घोषणा की उम्मीद
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने उम्मीद जताई है कि 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में कल एक संयुक्त घोषणा अपनाई जा सकती है।

नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स (BRICS) संसदीय मंच को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने काफी सकारात्मक रुख अपनाया है। थरूर ने उम्मीद जताई है कि इस महत्वपूर्ण मंच पर कल एक संयुक्त घोषणा (Joint Declaration) को अपनाया जा सकता है।
सहमति बनाने के प्रयास जारी
मीडिया से बात करते हुए शशि थरूर ने कहा कि सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उदाहरण देते हुए कहा, "पिछली बार जब शिखर सम्मेलन हुआ था, तब एक घोषणा को अपनाया गया था, जबकि कुछ देशों को लगा था कि ब्रिक्स देशों के बीच सहमति बनना संभव नहीं होगा। लेकिन अंततः वे सहमत हुए।"
थरूर ने आगे कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ब्रिक्स के संसद सदस्य भी एक घोषणा पर सहमत होंगे, जिसे यदि सब कुछ ठीक रहा तो कल जारी किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "वे इस पर काम कर रहे हैं, और मुझे उम्मीद है कि कल एक घोषणा आएगी।"
संसदीय कूटनीति का महत्व
शशि थरूर ने इस बात पर भी जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में केवल सरकार-से-सरकार बातचीत ही सब कुछ नहीं होती। उन्होंने संसदीय कूटनीति (Parliamentary Diplomacy) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा:
"सब कुछ भू-राजनीति या सरकार-से-सरकार संबंधों के बारे में नहीं है। संसद सदस्यों द्वारा निभाई जाने वाली भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।"
उन्होंने बताया कि सांसदों के बीच सीधा संवाद संवाद के ऐसे अवसर प्रदान करता है जो औपचारिक सरकारी बातचीत से परे होते हैं। इससे विभिन्न देशों के कानून निर्माताओं को साझा चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने का मंच मिलता है।
दुनिया भर के प्रतिनिधि दिल्ली में जमा
यह दो दिवसीय 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच भारत की संसद द्वारा नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कर रहे हैं, जिन्होंने सोमवार को उद्घाटन भाषण दिया।
इस मंच पर वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भागीदारी देखी जा रही है:
- 11 सदस्य देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल।
- 10 भागीदार देशों की सक्रिय भागीदारी।
- रूस, ब्राजील, युगांडा और क्यूबा जैसे देशों के प्रतिनिधिमंडल भी चर्चाओं में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं।
गौरतलब है कि सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'नई दिल्ली घोषणा 2026' को सर्वसम्मति से अपनाने की घोषणा की थी। उस शिखर सम्मेलन में संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया गया था।