अररिया: शिक्षा सेवकों ने सांसद से की गुहार, राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग

अररिया में शिक्षा सेवकों ने सांसद प्रदीप कुमार सिंह से मिलकर राज्यकर्मी का दर्जा और सेवा स्थायी करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा है।

Ghazala Saheb7 November 20262 min read0 viewsBihar
अररिया: शिक्षा सेवकों ने सांसद से की गुहार, राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग

अररिया में शिक्षा सेवकों और तालिमी मरकज कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को बिहार राज्य शिक्षा सेवक एवं शिक्षा सेवक तालिमी मरकज संघ की जिला इकाई के एक प्रतिनिधिमंडल ने सांसद प्रदीप कुमार सिंह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा और सरकार से जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की।

18 साल की सेवा, फिर भी अनिश्चित भविष्य

प्रतिनिधिमंडल ने सांसद को बताया कि इन कर्मियों की नियुक्ति साल 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर हुई थी। तब से ये कर्मी स्कूलों और उनके बाहर शिक्षा एवं साक्षरता से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।

  • कर्मियों ने बताया कि वे न केवल शैक्षणिक बल्कि विभागीय और गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां भी बखूबी निभा रहे हैं।
  • लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उन्हें अभी तक स्थायी सेवा का लाभ नहीं मिल सका है।
  • संघ का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने पहले भी बेहतर भविष्य और सरकारी सेवक का दर्जा देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

प्रमुख मांगें: राज्यकर्मी का दर्जा और सेवानिवृत्ति आयु में वृद्धि

ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगों को प्रमुखता से रखा गया है, ताकि कर्मियों का भविष्य सुरक्षित हो सके:

  • नियमावली में संशोधन: 2018 की नियमावली में बदलाव कर सभी कर्मियों को राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए।
  • विभागों में समायोजन: शिक्षा विभाग या किसी अन्य विभाग में कर्मियों को समायोजित किया जाए।
  • सेवानिवृत्ति आयु: रिटायरमेंट की उम्र को 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष किया जाए।
  • बीमा और प्रशिक्षण: विकास मित्रों की तर्ज पर एक करोड़ रुपये का ग्रुप बीमा मिले और सरकारी खर्च पर डीएलएड (D.El.Ed) प्रशिक्षण दिया जाए।

आर्थिक संकट और परिजनों की सुरक्षा की मांग

कर्मियों ने अपनी दयनीय स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि उन्हें पिछले चार महीने से मानदेय नहीं मिला है, जिससे उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

"सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर परिजनों को अनुग्रह अनुदान के साथ 36 महीने का अतिरिक्त मानदेय और अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी जानी चाहिए।"

प्रतिनिधिमंडल ने सांसद से आग्रह किया है कि वे इन मांगों को सरकार तक पहुंचाएं ताकि इन कर्मियों की समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान हो सके।

Share:

Comments

Leave a comment