शिमला के पूर्व एसपी पर दूसरी FIR: पुलिस फंड में हेराफेरी का आरोप

हिमाचल के पूर्व शिमला एसपी संजीव कुमार गांधी पर सरकारी फंड के दुरुपयोग और हेराफेरी के आरोप में दूसरी एफआईआर दर्ज की गई है।

Ghazala Saheb24 October 20263 min read0 viewsBihar
शिमला के पूर्व एसपी पर दूसरी FIR: पुलिस फंड में हेराफेरी का आरोप

हिमाचल प्रदेश के शिमला में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। हिमाचल प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी और वर्तमान डीआईजी संजीव कुमार गांधी के खिलाफ सरकारी धन के दुरुपयोग और हेराफेरी के आरोप में दूसरी एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई उनके शिमला के पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में कार्यकाल के दौरान हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं के बाद की गई है।

ऑडिट कमेटी की जांच में हुआ बड़ा खुलासा

हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, शिमला पुलिस स्टेशन में 22 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) के तहत यह मामला दर्ज किया गया। यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय द्वारा गठित एक ऑडिट कमेटी की रिपोर्ट के बाद की गई है।

ऑडिट कमेटी ने 2022-23 से 2024-25 के बीच पुलिस भवनों और आधिकारिक आवासों की मरम्मत और रखरखाव के लिए आवंटित लगभग 1.28 करोड़ रुपये के खर्च की जांच की थी। जांच में पाया गया कि संजीव कुमार गांधी के आधिकारिक निवास 'साउथवुड' पर लगभग 14,07,392 रुपये खर्च दिखाए गए थे, जबकि सरकार या पुलिस मुख्यालय द्वारा इस संपत्ति की मरम्मत के लिए कोई बजट स्वीकृत नहीं किया गया था। इसके अलावा, इस कार्य के लिए सक्षम प्राधिकारी से किसी भी प्रकार की पूर्व अनुमति या मंजूरी का कोई रिकॉर्ड भी नहीं मिला है।

जवानों के हक का पैसा खुद के बंगले पर लुटाया

जांच रिपोर्ट में फंड के हेरफेर के कई अन्य गंभीर मामले भी सामने आए हैं। ऑडिट में पाया गया कि पुलिस कर्मियों के कल्याण के लिए रखे गए पैसे को गलत तरीके से अन्य जगहों पर इस्तेमाल किया गया:

  • रामपुर का फंड: रामपुर में एसडीपीओ (SDPO) के आवास की मरम्मत के लिए स्वीकृत 2.80 लाख रुपये को तत्कालीन एसपी के शिमला स्थित आधिकारिक निवास पर खर्च कर दिया गया।
  • शोगी पुलिस बैरियर: शोगी पुलिस बैरियर के गार्ड पोस्ट की मरम्मत के लिए 2.50 लाख रुपये निकाले गए, लेकिन ऑडिट में पाया गया कि शोगी में प्रस्तावित मरम्मत का कोई सबूत नहीं है। यह राशि भी एसपी के निवास पर खर्च दिखाई गई।

इस अनियमितता का सीधा असर पुलिस कर्मियों पर पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, शोगी पुलिस पोस्ट अभी भी एक कंटेनर से संचालित हो रही है, जिसके कारण वहां तैनात जवानों को बेहद कठिन परिस्थितियों में अपनी ड्यूटी करनी पड़ रही है।

बजट और कार्यों में भी मिली गड़बड़ी

ऑडिट में भविष्य के बजट को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। वर्ष 2025-26 के लिए 28.67 लाख रुपये के बजट के तहत 50 कार्यों का प्रस्ताव था, लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि इनमें से 22 कार्य पूरे किए जा चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 13 कार्य उन प्रस्तावों से बाहर थे जिन्हें मूल रूप से मंजूरी दी गई थी। ऑडिट कमेटी ने स्वीकृत योजनाओं से हटकर किए गए इन खर्चों पर कड़ी आपत्ति जताई है।

पहले भी हो चुकी है एफआईआर

संजीव कुमार गांधी के खिलाफ यह दूसरी एफआईआर है। इससे ठीक एक दिन पहले, उन पर धोखाधड़ी और सरकारी धन के गबन के आरोप में एक मामला दर्ज किया गया था। वह मामला एक पुलिस कांस्टेबल की शिकायत पर आधारित था, जिसने आरोप लगाया था कि उसे आधिकारिक व्यवस्थाओं पर खर्च किए गए 1.87 लाख रुपये की प्रतिपूर्ति (reimbursement) नहीं दी गई थी।

"पुलिस कर्मियों के कल्याण और बुनियादी सुविधाओं के लिए निर्धारित धन को बिना उचित प्राधिकरण के अन्य उद्देश्यों के लिए मोड़ना एक अत्यंत गंभीर मामला है।" — हिमाचल प्रदेश पुलिस का आधिकारिक बयान

दूसरी ओर, 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी संजीव कुमार गांधी ने इन सभी आरोपों को एक "विच-हंट" (witch-hunt) करार दिया है। उन्होंने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है और उन्हें गलत कामों के खिलाफ आवाज उठाने के कारण निशाना बनाया जा रहा है।

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