'कांग्रेस के पतन का चरम': 1 नवंबर के प्रदर्शन पर शिवराज का हमला

शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के 1 नवंबर के प्रदर्शन को कांग्रेस के पतन का चरम बताया और व्यापारियों की चिंताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

Ghazala Saheb27 October 20262 min read0 viewsBihar
'कांग्रेस के पतन का चरम': 1 नवंबर के प्रदर्शन पर शिवराज का हमला

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पार्टी के आगामी 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाले विरोध प्रदर्शन पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विरोध करने और दिवाली के त्यौहार के समय जनता की चिंताओं को नजरअंदाज करने की कोशिश कर रही है।

व्यापारियों की चिंताओं को किया नजरअंदाज

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए देश में अशांति का माहौल बनाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कांग्रेस के व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी जनता की भावनाओं से पूरी तरह कट चुकी है।

"यह कांग्रेस के पतन का चरम है। उन्होंने मर्यादा की सभी सीमाएं पार कर दी हैं और संविधान की भी अनदेखी कर रहे हैं।"

चौहान ने आगे कहा कि दिवाली का समय है और व्यापारी चाहते हैं कि उनके व्यापार में कोई बाधा न आए। उन्होंने कांग्रेस की तुलना एक "जिद्दी बच्चे" से करते हुए कहा कि पार्टी व्यापारियों की जायज मांगों को सुनने के बजाय केवल विरोध में जुटी है।

कांग्रेस का पलटवार: सरकार पर लगाया दबाव का आरोप

दूसरी ओर, कांग्रेस के अखिल भारतीय समिति (AICC) के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार दिल्ली पुलिस पर दबाव डाल रही है ताकि विपक्ष के "पब्लिक इम्पीचमेंट" विरोध प्रदर्शन को रोका जा सके।

वेणुगोपाल ने बताया कि रामलीला मैदान में विरोध प्रदर्शन की तैयारी के लिए अनुमति मिलने के बावजूद, पुलिस के हस्तक्षेप के कारण काम रुक गया है। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई स्वतंत्र नहीं है, बल्कि सीधे केंद्र सरकार के निर्देश पर की जा रही है।

किसानों के लिए दिवाली का तोहफा

इस बीच, शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं और एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 30 अक्टूबर को गुजरात के बनासकांठा से पीएम-किसान योजना के तहत 18,690 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी करेंगे। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी ताकि वे खाद, बीज और अन्य आवश्यक कृषि सामग्री खरीद सकें।

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