भलुआरा में पटाखों के धमाके से मची तबाही, ग्रामीणों ने प्रशासन को घेरा

सीवान के भलुआरा में विस्फोटक नष्ट करने के दौरान हुए धमाके से दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने सुरक्षा में चूक का आरोप लगाकर प्रशासन का घेराव किया।

Ghazala Saheb24 October 20262 min read0 viewsBihar
भलुआरा में पटाखों के धमाके से मची तबाही, ग्रामीणों ने प्रशासन को घेरा

सीवान जिले के बड़हरिया प्रखंड के भलुआरा तकिया गांव में शनिवार देर शाम उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब पटाखों के विस्फोट की एक जोरदार आवाज से पूरा इलाका दहल उठा। यह घटना जामो बाजार थाने के आलमपुर से बरामद किए गए पटाखों और विस्फोटक पदार्थों को नष्ट करने की प्रक्रिया के दौरान हुई। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि ग्रामीणों के बीच भारी दहशत फैल गई और लोग जान बचाने के लिए अपने घरों से बाहर निकल आए।

धुएं के गुबार और दहशत का माहौल

विस्फोट के तुरंत बाद पूरे इलाके में धुएं का भारी गुबार फैल गया, जिससे लोगों में डर और बढ़ गया। ग्रामीणों ने बताया कि धमाका इतना अचानक और तेज था कि जो लोग आराम कर रहे थे या सो रहे थे, वे घबराकर घरों से बाहर भागने लगे। स्थिति ऐसी थी मानो गांव में आधी रात जैसा सन्नाटा और डर छा गया हो।

घरों को नुकसान और सुरक्षा पर सवाल

घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन और पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं:

  • घरों को क्षति: कुछ ग्रामीणों का दावा है कि धमाके की वजह से उनके घरों के करकट उड़ गए और खिड़कियों के जंगले टूट गए।
  • बीमारों की परेशानी: विस्फोट की तेज आवाज से गांव के बुजुर्गों और बीमार लोगों को काफी मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
  • सुरक्षा में चूक: ग्रामीणों का कहना है कि विस्फोटक पदार्थों को नष्ट करने जैसी संवेदनशील कार्रवाई के दौरान आसपास की आबादी की सुरक्षा का विशेष ध्यान नहीं रखा गया।

प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन और नोकझोंक

विस्फोट के बाद स्थिति तब और बिगड़ गई जब ग्रामीणों ने पुलिस और प्रशासन का घेराव कर दिया। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक की भी सूचना है। खबरों के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन के दौरान दमकल की गाड़ी में भी तोड़फोड़ करने की कोशिश की गई, जिससे गाड़ी को नुकसान पहुंचने की बात सामने आ रही है।

फिलहाल, इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। यह भी जांच का विषय है कि क्या विस्फोटक नष्ट करते समय निर्धारित सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं।

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