सीवान सदर अस्पताल में एचआईवी संक्रमित पिता-पुत्र को बिना जांच लौटाने पर अधीक्षक समेत चार से स्पष्टीकरण मांगा गया

Akhand India Desk11 September 20262 min read3 viewsHealth
सीवान सदर अस्पताल में एचआईवी संक्रमित पिता-पुत्र को बिना जांच लौटाने पर अधीक्षक समेत चार से स्पष्टीकरण मांगा गया

सीवान में सदर अस्पताल की बड़ी लापरवाही सामने आई है। 10 सितंबर को एचआईवी संक्रमित पिता-पुत्र को पैथोलॉजिकल जांच के लिए चार घंटे तक इंतजार कराया गया और बिना सैंपल लिये वापस भेज दिया गया। सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ श्रीनिवास प्रसाद ने सदर अस्पताल के अधीक्षक समेत चार स्वास्थ्य अधिकारियों व कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा है। मामले में दो प्रयोगशाला प्रावैधिकी का वेतन तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक रोक दिया गया है। संबंधित सभी से 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा गया है।

घटना की पूरी जानकारी

एचआईवी संक्रमित पिता-पुत्र 10 सितंबर को दोपहर करीब एक बजे सदर अस्पताल स्थित एआरटी केंद्र पहुंचे थे। परामर्श के बाद दोनों को पैथोलॉजिकल जांच कराने की सलाह दी गयी। इसके बाद दोनों जांच के लिए गये, लेकिन आरोप है कि दोपहर एक बजे से शाम पांच बजे तक सैंपल लेने के लिए उन्हें बैठाये रखा गया। शाम पांच बजे के बाद बिना सैंपल लिए ही दोनों को वापस भेज दिया गया। मजबूरन दोनों मरीजों को बिना जांच कराये लौटना पड़ा।

किस-किस से मांगा गया स्पष्टीकरण

इस मामले में एआरटी केंद्र के प्रयोगशाला प्रावैधिकी अनुज कुमार तथा सदर अस्पताल के प्रयोगशाला प्रावैधिकी धर्मेंद्र कुमार और प्रमोद कुमार से जवाब मांगा गया है। सीएस ने पूछा है कि मरीजों का सैंपल नियमानुसार क्यों नहीं लिया गया और उन्हें बिना जांच कराये वापस क्यों भेज दिया गया। पत्र में इसे सरकारी कार्यों के प्रति लापरवाही बताया गया है। वहीं, सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ अनिल कुमार सिंह से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। पत्र में कहा गया है कि उन्हें एचआईवी संक्रमित पिता-पुत्र की जांच नहीं होने की जानकारी थी, इसके बावजूद उनकी जांच कराने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया।

अन्य अधिकारियों की भूमिका

संचारी रोग पदाधिकारी-सह-जिला एड्स नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार से भी पूछा गया है कि मामले की जानकारी होने के बावजूद मरीजों की जांच कराने के लिए आवश्यक पहल क्यों नहीं की गयी। सीएस कार्यालय ने सभी संबंधित अधिकारियों व कर्मियों को पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के अंदर अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। निर्धारित अवधि में जवाब नहीं मिलने पर विधि सम्मत कार्रवाई के लिए विभाग को सूचित करने की चेतावनी दी गयी है। वहीं, दो प्रयोगशाला प्रावैधिकी का वेतन तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक अवरुद्ध कर दिया गया है।

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