रुईधासा महाकाल मंदिर में मां स्कंदमाता की विशेष पूजा

Prakriti Singh15 October 20262 min read0 viewsDharm
रुईधासा महाकाल मंदिर में मां स्कंदमाता की विशेष पूजा

किशनगंज के रुईधासा स्थित प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। गुरुवार को मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप, मां स्कंदमाता की विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान मंदिर परिसर पूरी तरह से भक्तिमय माहौल में डूबा रहा।

भक्तिमय हुआ मंदिर परिसर

मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। पुरोहित गुरु साकेत के सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में भक्तों ने पूरी श्रद्धा के साथ मां के दर्शन किए। रुईधासा स्थित इस मंदिर में मां दुर्गा के साथ-साथ महाकाल बाबा की भी नियमित पूजा की जाती है। शाम के समय मंदिर में भव्य आरती का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तिभाव के साथ शामिल होते हैं।

कौन हैं मां स्कंदमाता?

धार्मिक मान्यताओं और पुरोहित गुरु साकेत के अनुसार, मां स्कंदमाता नवदुर्गा का पांचवां स्वरूप हैं। उनके स्वरूप की कुछ विशेष विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • भगवान कार्तिकेय की माता: भगवान कार्तिकेय को 'स्कंद' के नाम से भी जाना जाता है, और उनकी माता होने के कारण देवी को स्कंदमाता कहा जाता है। मां की गोद में भगवान स्कंद बालरूप में विराजमान रहते हैं।
  • पद्मासना स्वरूप: देवी चार भुजाओं वाली हैं और कमल के आसन पर विराजती हैं, जिस कारण उन्हें पद्मासना भी कहा जाता है।
  • वाहन और दिव्य तेज: मां का वाहन सिंह है। उन्हें सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है और उनके चारों ओर सूर्य के समान दिव्य तेज का मंडल दिखाई देता है।

सुख, शांति और संतान सुख का प्रतीक

मां स्कंदमाता की उपासना का भक्तों के जीवन में विशेष महत्व बताया गया है। गुरु साकेत के अनुसार, मां की आराधना से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  1. मां स्कंदमाता को ममता, प्रेम और संतान की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
  2. उनकी कृपा से भक्तों के मन और मस्तिष्क में ज्ञान का विकास होता है।
  3. सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों को सुख-शांति और संतान की उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

संतान सुख की कामना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए मां स्कंदमाता की उपासना अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

Share:

Comments

Leave a comment