आगरा: सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य का हुआ बड़ा विस्तार, NGT ने दी मंजूरी

Prakriti Singh28 September 20262 min read1 viewUttar Pradesh
आगरा: सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य का हुआ बड़ा विस्तार, NGT ने दी मंजूरी

आगरा के प्रकृति प्रेमियों और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य (Soor Sarovar Bird Sanctuary) के विस्तार को आधिकारिक रूप से दर्ज कर लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किए गए इस विस्तार के बाद अब इस अभयारण्य का कुल क्षेत्रफल बढ़कर 798.1505 हेक्टेयर हो गया है।

NGT के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। यह फैसला केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) की सिफारिशों के अनुपालन में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी की गई विभिन्न अधिसूचनाओं के बाद आया है।

विस्तार का पूरा गणित: कैसे बढ़ा अभयारण्य का क्षेत्रफल?

अभयारण्य के इस बड़े विस्तार को तीन अलग-अलग चरणों में पूरा किया गया है, जिसकी जानकारी ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में दी है:

  • पहला चरण: 12 जून 2024 को जारी अधिसूचना के माध्यम से आगरा में 403.09 हेक्टेयर क्षेत्र को सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य के रूप में अधिसूचित किया गया।
  • दूसरा चरण: इसके बाद सूरदास रिजर्व फॉरेस्ट ब्लॉक के 380.558 हेक्टेयर क्षेत्र को अभयारण्य में शामिल किया गया। इसके लिए 27 दिसंबर 2024 को अधिसूचना जारी की गई थी, जिसे बाद में 31 अगस्त 2026 को संशोधित किया गया।
  • तीसरा चरण: विस्तार के अंतिम हिस्से में 14.5025 हेक्टेयर सरकारी जमीन को शामिल किया गया, जिसके लिए 10 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी की गई।

इन तीनों हिस्सों को मिलाकर अब अभयारण्य का कुल क्षेत्रफल 798.1505 हेक्टेयर हो गया है।

CEC की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन

यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के 23 सितंबर, 2022 के आदेश और केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) की सिफारिशों से जुड़ा था। CEC ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26A के तहत सूरदास रिजर्व फॉरेस्ट ब्लॉक और बफर जोन के हिस्से के रूप में सरकारी जमीन को अभयारण्य में शामिल किया जाना चाहिए।

ट्रिब्यूनल ने गौर किया कि जब यह मामला लंबित था, तब उत्तर प्रदेश सरकार ने CEC की सिफारिशों को लागू करने के लिए सक्रिय कदम उठाए और आवश्यक अधिसूचनाएं जारी कीं। NGT ने यह भी नोट किया कि 10 सितंबर 2026 की अधिसूचना के साथ ही आवेदक द्वारा मांगी गई राहत पूरी हो गई है। इसके परिणामस्वरूप, ट्रिब्यूनल ने इस मूल आवेदन को निस्तारित (dispose) कर दिया है।

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