राज्यों का पूंजीगत व्यय 8.5 लाख करोड़ तक पहुंचेगा: क्रिसिल की बड़ी रिपोर्ट
क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, केंद्र के सहयोग से इस वित्त वर्ष में राज्यों का पूंजीगत व्यय बढ़कर 8.5 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है।

क्रिसिल रेटिंग्स (Crisil Ratings) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में भारतीय राज्यों का पूंजीगत व्यय (Capital Outlay) तेजी से बढ़कर लगभग 8.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। केंद्र सरकार के बढ़ते सहयोग और राज्यों के पास बेहतर वित्तीय क्षमता के कारण बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर खर्च करने की रफ्तार में जबरदस्त तेजी आने की उम्मीद है।
बुनियादी ढांचे और शहरी विकास पर होगा बड़ा दांव
रिपोर्ट के अनुसार, इस खर्च के विस्तार में सबसे बड़ी भूमिका शहरी बुनियादी ढांचे (Urban Infrastructure) की होगी। विशेष रूप से जल आपूर्ति, स्वच्छता, आवास और शहरी विकास (WSS-H-UD) जैसे क्षेत्रों में खर्च में भारी उछाल देखा जा सकता है।
यह विश्लेषण भारत के कुल सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा रखने वाले 18 राज्यों पर आधारित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यों का यह पूंजीगत व्यय पिछले वित्त वर्ष के 8.6 प्रतिशत की वृद्धि दर को भी पीछे छोड़ देगा।
SASCI योजना बनी राज्यों के निवेश का मुख्य आधार
राज्यों के इस बढ़ते निवेश के पीछे विशेष सहायता योजना (SASCI) का सबसे बड़ा हाथ माना जा रहा है। यह योजना राज्यों को उनके सामान्य ऋण सीमा के बाहर 50 साल के लिए ब्याज मुक्त ऋण प्रदान करती है, जिससे उन्हें विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय मजबूती मिलती है।
- इस वित्त वर्ष में SASCI के तहत आवंटन 33 प्रतिशत बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
- यह योजना राज्यों को अपनी नियमित उधारी सीमा का उपयोग किए बिना बड़े निवेश करने की गुंजाइश देती है।
"SASCI के उच्च समर्थन से राज्यों को अपनी सामान्य उधारी सीमा का उपयोग किए बिना निवेश करने के लिए अतिरिक्त जगह मिलती है," क्रिसिल रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर अनुज सेठी ने कहा।
किन क्षेत्रों में होगा सबसे ज्यादा पैसा खर्च?
राज्यों के कुल पूंजीगत व्यय का वितरण विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इस प्रकार रहने की संभावना है:
- परिवहन (Transport): सड़कों और पुलों के निर्माण के साथ यह सबसे बड़ा हिस्सा बना रहेगा, जो कुल खर्च का लगभग एक-चौथाई (25%) होगा।
- शहरी विकास और जल आपूर्ति: यह क्षेत्र कुल खर्च का लगभग 20% हिस्सा कवर करेगा।
- सिंचाई (Irrigation): सिंचाई क्षेत्र का योगदान भी लगभग 20% रहने का अनुमान है, हालांकि कुछ राज्यों में कम बजट आवंटन के कारण इसमें वृद्धि की गति थोड़ी धीमी रह सकती है।
इसके अलावा, ग्रामीण विकास, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी निवेश का प्रवाह बना रहेगा। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए फंड का समय पर जारी होना और परियोजनाओं का कुशल कार्यान्वयन बेहद जरूरी होगा।