सुल्तानगंज-अगुवानी गंगा पुल का काम तेज, 2027 तक शुरू होगा महासेतु

सुल्तानगंज और अगुवानी के बीच बन रहे गंगा महासेतु का काम युद्धस्तर पर जारी है। 2027 के अंत तक यह पुल उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ेगा।

Ghazala Saheb8 November 20262 min read0 viewsBihar
सुल्तानगंज-अगुवानी गंगा पुल का काम तेज, 2027 तक शुरू होगा महासेतु

सुल्तानगंज और खगड़िया के अगुवानी घाट के बीच गंगा नदी पर बन रहे महत्वाकांक्षी फोरलेन महासेतु के निर्माण में अब तेजी आ गई है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के चेयरमैन धर्मेंद्र कुमार ने हाल ही में सुल्तानगंज का स्थलीय निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं।

2027 के अंत तक चालू होने का लक्ष्य

लगभग 1,710 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस 3.16 किलोमीटर लंबे मुख्य पुल (एप्रोच रोड सहित कुल 25 किलोमीटर) को अब नवंबर-दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। विक्रमशिला सेतु पर बढ़ते दबाव और उसके क्षतिग्रस्त होने की स्थिति को देखते हुए, उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच संपर्क बनाए रखने के लिए इस पुल का निर्माण बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों की निगरानी में सुधारा जा रहा है डिजाइन

इस परियोजना को 2014 में शिलान्यास के बाद से कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। अप्रैल 2022, जून 2023 और अगस्त 2024 में पुल के कुछ हिस्सों के गिरने के बाद इसकी गुणवत्ता और डिजाइन पर गंभीर सवाल उठे थे। अब स्थिति को सुधारने के लिए आईआईटी रुड़की, गुवाहाटी और मध्य प्रदेश के विशेषज्ञों की निगरानी में संशोधित डिजाइन पर काम किया जा रहा है।

पुल की मजबूती और भार संतुलन को बेहतर बनाने के लिए सुल्तानगंज की ओर पिलर संख्या 2 से 5 के बीच तीन नए अतिरिक्त पिलर भी बनाए जा रहे हैं।

24 घंटे चल रहा है निर्माण कार्य

निर्माण एजेंसी एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन 100 सदस्यीय तकनीकी दल के साथ युद्धस्तर पर काम कर रही है। गंगा की बीच धारा में पाया संख्या 10, 11 और 12 पर वेलकैप कटिंग और फाउंडेशन ढलाई का कार्य 24 घंटे की शिफ्ट में चलाया जा रहा है।

पर्यटकों के लिए 'डॉल्फिन ऑब्जर्वेटरी'

इस पुल की एक खास विशेषता यह है कि पाया संख्या-10 पर पर्यटकों के लिए एक 'डॉल्फिन ऑब्जर्वेटरी' (वेधशाला) बनाई जा रही है। यहाँ से लोग गंगा में रहने वाली दुर्लभ गांगेय डॉल्फिन को करीब से देख सकेंगे।

व्यापार और आवागमन को मिलेगी नई रफ्तार

पुल के चालू होने से न केवल भागलपुर और खगड़िया, बल्कि सहरसा, मधेपुरा, सुपौल और झारखंड के बीच व्यापार और आवागमन बेहद सुगम हो जाएगा। इससे पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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