सुपौल में नए श्रम कानूनों पर मंथन: चार संहिताओं की बारीकियां समझें

सुपौल में चार नई श्रम संहिताओं को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें कामगारों के अधिकारों और नए नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई।

Ghazala Saheb7 November 20262 min read0 viewsBihar
सुपौल में नए श्रम कानूनों पर मंथन: चार संहिताओं की बारीकियां समझें

सुपौल के संयुक्त श्रम भवन में शनिवार को श्रम व्यवस्था में होने वाले बड़े बदलावों को लेकर एक दिवसीय जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चार नई श्रम संहिताओं (Labor Codes) के प्रावधानों के बारे में कामगारों, नियोजकों और संबंधित संगठनों को विस्तार से जानकारी देना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रम अधीक्षक सुशील कुमार यादव ने की।

29 कानूनों का अब एक ही समाधान: चार नई संहिताएं

प्रशिक्षण के दौरान श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सुबेश कुमार पासवान ने विभागीय बारीकियों को साझा करते हुए बताया कि सरकार ने श्रम व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। पूर्व के 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को अब समाहित कर मात्र चार नई संहिताओं में बदल दिया गया है।

इन चार महत्वपूर्ण संहिताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • मजदूरी (वेतन) संहिता, 2019
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020
  • औद्योगिक संबंध संहिता, 2020
  • उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशाएं संहिता, 2020

कामगारों के अधिकारों और सुरक्षा पर विशेष जोर

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बताया गया कि नई संहिताओं के लागू होने से श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए कई कड़े और स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। अब सभी प्रकार के रोजगारों में न्यूनतम वेतन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा, वेतन भुगतान की प्रक्रिया, बोनस, भविष्य निधि (PF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESIC), ग्रेच्युटी और मातृत्व लाभ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

विशेष रूप से गिग वर्कर्स (Gig Workers) और अन्य असंगठित कामगारों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी नए नियम बनाए गए हैं। प्रशिक्षण में निम्नलिखित बिंदुओं पर भी प्रकाश डाला गया:

  • कामगारों को सेवा समाप्ति पर विमुक्ति पत्र (Relieving Letter) देना।
  • नियमित स्वास्थ्य जांच और कार्यस्थल पर आवश्यक सुविधाएं।
  • कार्य के घंटे और नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधान।
  • समितियों एवं ट्रेड यूनियनों की भूमिका।
  • हड़ताल, छंटनी और औद्योगिक प्रतिष्ठानों के बंद होने से जुड़े नियम।

नियोजकों और कामगारों के बीच संवाद जरूरी: अपर समाहर्ता

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर समाहर्ता सच्चिदानंद सुमन ने इस अवसर पर कहा कि श्रम कानूनों की सही जानकारी केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इन कानूनों की विस्तृत जानकारी जमीनी स्तर पर कामगारों, नियोजकों और संबंधित संगठनों तक पहुंचना अत्यंत आवश्यक है ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।

इस महत्वपूर्ण सत्र में बाल कल्याण समिति, सुपौल के सदस्य आदित्य कुमार चौधरी, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (सुपौल सदर) मिहिर कुमार, पिपरा के अमित कुमार केशरी, बसंतपुर के सुबेश कुमार पासवान, राघोपुर के नितीन कुमार, प्रतापगंज के विकास कुमार और किशनपुर के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न संगठनों के लोग उपस्थित रहे।

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