सुपौल: अभियोजन मामलों में देरी पर भड़के डीएम, गवाहों की उपस्थिति का आदेश
सुपौल डीएम सावन कुमार ने अभियोजन मामलों में देरी और गवाहों की अनुपस्थिति पर सख्त निर्देश दिए। उन्होंने उत्पाद मामलों में कम सजा की दर पर नाराजगी जताई।

सुपौल में जिलाधिकारी सावन कुमार ने अभियोजन मामलों की समीक्षा के दौरान कड़ा रुख अपनाया है। समाहरणालय स्थित लहटन चौधरी सभागार में आयोजित बैठक में उन्होंने लंबित मुकदमों के त्वरित निष्पादन और गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए।
गवाहों की अनुपस्थिति से बढ़ रही है न्यायिक देरी
बैठक के दौरान विशेष लोक अभियोजक (एनडीपीएस एवं उत्पाद) ने एक महत्वपूर्ण समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि गवाहों के समय पर न्यायालय में उपस्थित न होने के कारण कई गंभीर मामलों का निष्पादन नहीं हो पा रहा है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
इस पर जिलाधिकारी ने पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया कि वे अनुसंधानकर्ता (IO) सहित पुलिस पक्ष के अन्य गवाहों की न्यायालय में समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अपने स्तर से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करें।
डॉक्टरों की गवाही और उत्पाद मामलों पर सख्ती
न्यायिक कार्य में तेजी लाने के लिए डीएम ने सिविल सर्जन को भी सख्त हिदायत दी। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों की गवाही के लिए उनकी समय पर उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि मामलों में देरी न हो।
इसके अलावा, उत्पाद (Excise) विभाग से संबंधित मामलों में सजा की दर कम होने पर डीएम ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अभियोजन पक्ष को इन मामलों में अधिक प्रभावी ढंग से पैरवी करने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए ठोस प्रयास करने पर जोर दिया।
इन गंभीर मामलों को मिलेगी प्राथमिकता
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि एनडीपीएस, पॉक्सो और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर आपराधिक मामलों को विशेष प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा:
ऐसे मामलों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित किया जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो और दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिल सके।
इस समीक्षा बैठक में पुलिस अधीक्षक, सिविल सर्जन, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, उत्पाद अधीक्षक, विधि शाखा के प्रभारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।