सुपौल: जलजमाव की समस्या बनेगी कमाई का जरिया, चौर में होगा मछली पालन

सुपौल जिले में जलजमाव की समस्या अब किसानों के लिए एक बड़ा आर्थिक अवसर बनने जा रही है। प्रशासन ने जिले के चौर क्षेत्रों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और इसके माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य उन इलाकों का सदुपयोग करना है, जहाँ लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण खेती करना मुश्किल होता है।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रशासन की बड़ी पहल
इसी सिलसिले में बुधवार को सरायगढ़ प्रखंड के इटहरी राजस्व मौजा में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त (DDC) इंद्रवीर कुमार ने स्थानीय किसानों और जनप्रतिनिधियों के साथ विस्तार से चर्चा की। डीडीसी ने कहा कि सुपौल जिले में मत्स्य विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। जिले के कई हिस्सों में साल भर जलजमाव की स्थिति बनी रहती है, जिसे यदि सही ढंग से प्रबंधित किया जाए, तो यह मछली पालन के लिए एक बेहतरीन संसाधन साबित हो सकता है।
"जलजमाव वाले क्षेत्रों का बेहतर उपयोग होने से न केवल पानी की समस्या का समाधान होगा, बल्कि स्थानीय किसानों के लिए आय के नए रास्ते भी खुलेंगे।"
कैसे लागू होगी यह योजना?
मत्स्य पालन की इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन ने एक चरणबद्ध प्रक्रिया तैयार की है। योजना के क्रियान्वयन के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:
- क्षेत्रों की पहचान: सबसे पहले अंचल कार्यालय के माध्यम से अमीन द्वारा उन क्षेत्रों को चिह्नित किया जाएगा जहाँ जलजमाव की समस्या है।
- सीमा निर्धारण: चिह्नित किए गए क्षेत्रों की सीमाओं का सटीक निर्धारण किया जाएगा।
- किसान संवाद: इसके बाद संबंधित किसानों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की जाएगी।
- सहमति और संसाधन: किसानों की सहमति और वहां उपलब्ध संसाधनों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जनप्रतिनिधियों और किसानों ने जताया समर्थन
बैठक के दौरान इटहरी के किसानों ने सरकार की इस योजना का स्वागत किया और चौर क्षेत्रों के विकास के लिए योजना तैयार करने पर अपनी सहमति दी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस दिशा में प्रशासन को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
इस महत्वपूर्ण बैठक में सरायगढ़ के प्रमुख, बौराहा एवं सरायगढ़ पंचायतों के मुखिया सहित कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। प्रशासनिक स्तर पर जिला मत्स्य पदाधिकारी संजय कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) अच्युतानंद कुमार, अंचल अधिकारी और राजस्व पदाधिकारी सहित अन्य कर्मी भी मौजूद रहे।