सुपौल: अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर मेधावी और साहसी बेटियां सम्मानित

Ghazala Saheb11 October 20262 min read0 viewsBihar
सुपौल: अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर मेधावी और साहसी बेटियां सम्मानित

सुपौल में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, खेलकूद और साहस के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली बालिकाओं को सम्मानित करना और उन्हें उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।

प्रतिभाशाली छात्राओं और खिलाड़ियों को मिला सम्मान

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में उन बालिकाओं को मंच पर बुलाया गया जिन्होंने अपनी मेहनत से समाज में मिसाल पेश की है। शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाली चांदनी कुमारी, करिश्मा कुमारी, कृति कुमारी और स्वाति कुमारी को उनकी शैक्षणिक सफलता के लिए सम्मानित किया गया।

खेल के मैदान में भी बालिकाओं का दबदबा रहा, जहाँ निम्नलिखित खिलाड़ियों को सराहा गया:

  • भवानी कुमारी: हाई जंप में शानदार उपलब्धि हासिल करने के लिए।
  • लक्ष्मी कुमारी: एथलेटिक्स में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए।

इसके अलावा, समाज में साहस और बहादुरी का परिचय देने वाली दो अन्य बालिकाओं को भी उनकी निडरता के लिए सम्मानित किया गया, जिससे अन्य बालिकाओं को भी प्रेरणा मिल सके।

कानूनी जागरूकता और सशक्तिकरण पर जोर

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष राजेश कुमार बच्चन के निर्देशन में हुए इस कार्यक्रम में बालिकाओं को आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का पाठ पढ़ाया गया। महिला न्यायिक पदाधिकारियों ने बालिकाओं से संवाद करते हुए उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित किया।

"शिक्षा बालिकाओं के सशक्तीकरण का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। शिक्षित और जागरूक बालिकाएं न केवल अपने अधिकारों को बेहतर ढंग से समझ सकती हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।"

परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश राहुल उपाध्याय ने बालिकाओं के सर्वांगीण विकास को समाज की एक अनिवार्य आवश्यकता बताया। वहीं, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अमित गौरव ने बालिकाओं को उनके विधिक अधिकारों और निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी जरूरतमंद आर्थिक या अन्य कठिनाइयों के कारण न्याय से वंचित रहता है, तो वह सीधे जिला विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क कर सकता है।

सुपौल बार एसोसिएशन के सचिव सुधीर झा ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजनों से बालिकाओं के विकास को नई दिशा मिलती है।

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