सुपौल: जल संरक्षण और हरियाली बचाने की मुहिम, मनाया गया विशेष दिवस
सुपौल में जल-जीवन-हरियाली दिवस मनाया गया। वक्ताओं ने जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए जन भागीदारी की अपील की।

सुपौल में मंगलवार को जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय के तत्वावधान में जल संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'जल-जीवन-हरियाली दिवस' का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने के प्रति आम जनता में जागरूकता पैदा करना था।
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों और वक्ताओं ने पर्यावरण की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने जल संचयन के विभिन्न तरीकों, विशेष रूप से वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। चर्चा के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया:
- गिरते भू-जल स्तर में सुधार लाने के उपाय।
- पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार और संरक्षण।
- पर्यावरण संतुलन के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण।
- प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग।
जन आंदोलन बनाने की अपील
वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि पर्यावरण का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों या नीतियों से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज का हर व्यक्ति इसमें सक्रिय रूप से शामिल नहीं होगा, तब तक वास्तविक बदलाव नहीं आ सकता। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने जल संरक्षण को एक 'जन आंदोलन' का रूप देने का आह्वान किया, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और हरा-भरा वातावरण मिल सके।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर डीआरडीए के निदेशक (एनईपी) अनित कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी संजय कुमार, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (विकसित भारत-जी राम जी) कृष्ण कांत सिंह, मत्स्य विकास पदाधिकारी शक्ति रंजन, पंचायती राज के प्रतिनिधि, डीआरडीए के तकनीकी सहायक वरुण देव राय सहित विभिन्न विभागों के कई पदाधिकारी और कर्मी उपस्थित थे। कार्यक्रम के माध्यम से सभी से अपील की गई कि वे जल-जीवन-हरियाली अभियान के उद्देश्यों को घर-घर तक पहुँचाएँ।