सुपौल: संतमत के 15वें ध्यान अधिवेशन में उमड़ी आस्था की लहर

सुपौल के सुकमारपुर में संतमत का 15वां वार्षिक ध्यान अधिवेशन आयोजित हुआ, जहाँ स्वामी सत्यानंद जी ने मानवता और शांति का संदेश दिया।

Ghazala Saheb5 November 20262 min read0 viewsBihar
सुपौल: संतमत के 15वें ध्यान अधिवेशन में उमड़ी आस्था की लहर

बिहार के सुपौल जिले में भक्ति और आध्यात्मिकता का एक अनूठा संगम देखने को मिला। नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या तीन स्थित सुकमारपुर गौरवगढ़ में सुपौल संतमत ध्यान अधिवेशन का 15वां वार्षिक आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय भव्य कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु सपरिवार पहुंचे, जिससे पूरा क्षेत्र भजनों और जयकारों से गूंज उठा।

मानवता और शांति का मार्ग है संतमत

अधिवेशन के दौरान अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता परम पूज्य स्वामी श्री सत्यानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक सभा नहीं, बल्कि मानवता, शांति और आत्मकल्याण का एक महान अभियान है।

"संतमत किसी एक जाति या धर्म तक सीमित नहीं है। यह सभी धर्मों के सार को स्वीकार करते हुए मानवता को एक सूत्र में बांधता है। सबका सम्मान और सबका कल्याण ही इसकी विशेषता है।"

स्वामी जी ने वर्तमान समाज में बढ़ते तनाव, नशाखोरी, पारिवारिक कलह और मानसिक परेशानियों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन समय में ध्यान और योग ही व्यक्ति को आत्मिक शांति और सकारात्मकता प्रदान कर सकते हैं।

युवाओं को नशे और मोबाइल से बचने की सलाह

स्वामी सत्यानंद जी ने आज की पीढ़ी, विशेषकर युवाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे:

  • मोबाइल और नशे की लत से दूर रहें।
  • ध्यान, योग और सदाचार को जीवन का हिस्सा बनाएं।
  • एकाग्रता के साथ अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ें।

उन्होंने सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के संदेश को दोहराते हुए कहा कि "ईश्वर का भजन करो और मानव सेवा करो"—यही जीवन को सार्थक बनाने का असली मार्ग है।

दिग्गज नेताओं और समाजसेवियों की रही उपस्थिति

इस आध्यात्मिक समागम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में निर्मली विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, भाजपा नेता डॉ. विजय शंकर चौधरी, पूर्व मुख्य पार्षद जगदीश प्रसाद यादव, वार्ड पार्षद शिवराम यादव सहित कई गणमान्य नागरिक और साधु-महात्मा उपस्थित रहे।

अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा के सदस्य डॉ. अमन कुमार ने भी इस अवसर पर कहा कि ऐसे आयोजनों से आने वाली पीढ़ी को अच्छे संस्कार मिलते हैं और वे सद्गुरु के विचारों से जुड़ पाते हैं।

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