सुपौल: टिन की छत के नीचे 1000 बच्चों का भविष्य, जर्जर भवन में पढ़ाई

Ghazala Saheb14 October 20262 min read0 viewsBihar
सुपौल: टिन की छत के नीचे 1000 बच्चों का भविष्य, जर्जर भवन में पढ़ाई

बिहार के सुपौल जिले से शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। मरौना प्रखंड के बेलही स्थित आदर्श मध्य विद्यालय में बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल का भवन इतना जर्जर हो चुका है कि यहाँ हर पल किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है।

गर्मी में तपिश और बारिश में टपकती छत का डर

विद्यालय का मुख्य भवन टिन और पुरानी ईंटों से बना है, जिसकी हालत बेहद खराब है। इस जर्जर ढांचे के कारण विद्यार्थियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:

  • भीषण गर्मी: गर्मियों के दिनों में टिन की छत के नीचे बैठना बच्चों के लिए असहनीय हो जाता है।
  • बारिश की समस्या: मानसून के दौरान छत से पानी टपकता है और कमरों में जलजमाव हो जाता है।
  • सुरक्षा का खतरा: पुरानी ईंटों और कमजोर ढांचे के कारण बच्चों की सुरक्षा पर हमेशा सवाल उठते रहते हैं।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक विनायक प्रसाद यादव ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को पत्र लिखकर नए पक्के भवन के निर्माण की मांग की है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक लगभग 1,000 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जिनके लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना अनिवार्य है।

मौजूदा संसाधनों की बदहाली

स्कूल परिसर में कुछ पक्के भवन तो मौजूद हैं, लेकिन वे पढ़ाई के काम नहीं आ पा रहे हैं। प्रधानाध्यापक के अनुसार, वर्तमान स्थिति कुछ इस प्रकार है:

  1. एक पक्के कमरे का उपयोग कार्यालय के रूप में किया जा रहा है।
  2. दूसरे पक्के कमरे में मध्याह्न भोजन (Mid-day Meal) से संबंधित सामग्री का भंडारण होता है।
  3. सड़क के दूसरी ओर स्थित चार कमरों वाला पक्का भवन भी इतना जर्जर है कि वहां पढ़ाई संभव नहीं है।

परिणामस्वरूप, सभी कक्षाओं के लिए मुख्य रूप से छह कमरों वाले उसी जर्जर टिन और पुरानी ईंटों से बने भवन का सहारा लेना पड़ रहा है।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

इस मामले पर प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि विद्यालय की ओर से इस संबंध में पत्राचार किया जा चुका है। अब नए भवन के निर्माण की मांग पर संबंधित विभाग की पहल का इंतजार है।

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