दिवाली की खुशियां मातम में बदली: पंजाब में सुपौल के युवक की मौत
पंजाब के ब्यास में सड़क हादसे में सुपौल के सूरज उरांव की मौत हो गई। दिवाली पर घर लौट रहे युवक के शव से परिवार में मातम पसर गया।

सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड की ग्वालपाड़ा पंचायत में उस वक्त मातम पसर गया, जब दिवाली की खुशियां मनाने की तैयारी कर रहा एक परिवार अपने इकलौते कमाने वाले सदस्य को हमेशा के लिए खो बैठा। पंजाब के ब्यास में हुए एक भीषण सड़क हादसे ने 25 वर्षीय सूरज उरांव की जान ले ली। सूरज दिवाली के अवसर पर अपने घर सुपौल लौटने वाला था, लेकिन घर पहुंचने से पहले ही नियति ने उसे मौत की नींद सुला दिया।
रेलवे स्टेशन जाते समय हुआ दर्दनाक हादसा
परिजनों के अनुसार, सूरज पंजाब में एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी का काम करता था। शुक्रवार को काम खत्म करने के बाद वह अपने कमरे से रेलवे स्टेशन जाने के लिए निकला था। वह ट्रेन पकड़कर अपने गांव पहुंचना चाहता था, लेकिन सड़क पार करते समय एक तेज रफ्तार कार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में सूरज की मौके पर ही मौत हो गई।
तीन मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
सूरज की मौत ने न केवल उसके माता-पिता बल्कि उसकी पत्नी और तीन छोटे बच्चों के जीवन को भी अंधकार में धकेल दिया है। सूरज अपने पीछे तीन मासूम बच्चों को छोड़ गया है:
- साक्षी: दो वर्षीय मासूम पुत्री
- संतोष: तीन वर्षीय पुत्र
- सुशांत: आठ माह का छोटा बेटा
इन मासूम बच्चों को अभी यह भी नहीं पता कि उनके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। पत्नी ललिया देवी का रो-रोकर बुरा हाल है और परिवार के सामने अब गुजर-बसर करने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
"हादसे में सूरज का शरीर इतना क्षत-विक्षत हो गया था कि पोस्टमार्टम कराने में भी काफी कठिनाई हुई।" - अमित कुमार (मृतक का चचेरा भाई)
आखिरी फोन कॉल और गांव में पसरा सन्नाटा
सूरज की बहन रीता कुमारी ने बताया कि शुक्रवार शाम करीब चार बजे उसकी भाई से आखिरी बार फोन पर बात हुई थी। सूरज ने बड़े उत्साह के साथ कहा था, "मैं ट्रेन पकड़ने जा रहा हूं और दिवाली पर घर आ जाऊंगा।"
उसकी इन बातों ने परिवार को उम्मीद दी थी, लेकिन किसी को नहीं पता था कि ये शब्द उसके परिवार के लिए आखिरी साबित होंगे। जिस घर में दिवाली के दीये जलने थे, वहां अब केवल सिसकियां और मातम का सन्नाटा पसरा हुआ है।