लखीमपुर खीरी हिंसा: सुप्रीम कोर्ट सख्त, नए जज और सरकारी वकील के रवैये पर इलाहाबाद हाईकोर्ट से मांगी रिपोर्ट

Prakriti Singh22 September 20263 min read1 viewUttar Pradesh
लखीमपुर खीरी हिंसा: सुप्रीम कोर्ट सख्त, नए जज और सरकारी वकील के रवैये पर इलाहाबाद हाईकोर्ट से मांगी रिपोर्ट

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले की सुनवाई के लिए एक अनुभवी और वरिष्ठ सरकारी वकील (Public Prosecutor) नियुक्त करने के अनुरोध पर जवाब मांगा है। इसके साथ ही, मामले की सुनवाई कर रहे नए ट्रायल जज के कामकाज और सरकारी वकील के रवैये पर सवाल उठाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस संबंध में एक 'सीलबंद रिपोर्ट' मांगी है।

गवाहों के साथ हो रहा है अन्याय? प्रशांत भूषण के गंभीर आरोप

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष के वकील प्रशांत भूषण ने अदालत के सामने कुछ बेहद चौंकाने वाले और गंभीर तथ्य रखे। उन्होंने नए नियुक्त किए गए ट्रायल जज और सरकारी वकील के आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से न्याय की हत्या हो सकती है।

प्रशांत भूषण ने विशेष रूप से एक मुख्य चश्मदीद गवाह, शेर सिंह के मामले का जिक्र किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि:

  • गवाह शेर सिंह की बीमारी के संबंध में मेडिकल स्लिप पेश की गई थी, ताकि वह ट्रायल में शामिल न हो सके।
  • इसके बावजूद, ट्रायल जज ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (Non-bailable warrant) जारी कर दिया।
  • सरकारी वकील का यह कहना कि गवाह अब पेश होने के लिए तैयार नहीं है, मामले की गंभीरता को कम करने की कोशिश जैसा लगता है।

अदालत ने भी इस पर चिंता व्यक्त की। जस्टिस जोयमालया बागची ने सरकारी वकील के इस रुख पर सवाल उठाया कि गवाह अब आने को तैयार नहीं है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि मुख्य गवाहों के साथ इस तरह का व्यवहार मामले में भारी अन्याय का कारण बन सकता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जोयमालया बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे, ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

  1. कोर्ट की रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वह शिकायतकर्ता के आवेदन और कोर्ट के आदेश की एक प्रति इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजे।
  2. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को इस मामले की जांच करने और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
  3. हाईकोर्ट को निर्देश दिया गया है कि वह की गई कार्रवाई के आधार पर सुप्रीम कोर्ट को एक 'सीलबंद रिपोर्ट' (Sealed-cover report) सौंपे।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह जज द्वारा अन्य मामलों (जैसे NDPS या SC/ST एक्ट) में किए गए कामकाज पर टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन वर्तमान मामले में ट्रायल की निगरानी करना और उचित कार्रवाई सुनिश्चित करना आवश्यक है।

क्या है लखीमपुर खीरी हिंसा का पूरा मामला?

यह पूरा मामला 3 अक्टूबर, 2021 को लखीमपुर खीरी के टिकुनिया में हुई हिंसा से जुड़ा है। इस दर्दनाक घटना में आठ लोगों की जान चली गई थी। आरोप है कि प्रदर्शनकारी किसानों पर एक एसयूवी (SUV) चढ़ाने से यह हादसा हुआ था।

इस मामले में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को आरोपी बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी निचली अदालत को निर्देश दिया था कि इस मामले की कार्यवाही में तेजी लाई जाए और मुख्य चश्मदीद गवाहों को सुरक्षा प्रदान की जाए। अब कोर्ट के ताजा रुख से साफ है कि न्याय प्रक्रिया में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

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