सुपौल: 'सुरक्षित बचपन अभियान' का आगाज, 16 स्कूलों में बच्चों को मिले कानूनी अधिकार
सुपौल में 'सुरक्षित बचपन अभियान' शुरू हुआ। 16 स्कूलों में बच्चों को बाल संरक्षण कानूनों और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।

सुपौल जिले में बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें शोषण एवं उत्पीड़न से बचाने के लिए सुरक्षित बचपन अभियान की शुरुआत की गई है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की परिकल्पना पर आधारित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों को एक सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। सोमवार को अभियान के पहले दिन जिले के विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों के विद्यालयों में व्यापक स्तर पर विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
विभिन्न प्रखंडों के 16 स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम
जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार बच्चन के दिशा-निर्देश में यह अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के पहले दिन जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 16 विद्यालयों को कवर किया गया। इन कार्यक्रमों में पैनल अधिवक्ताओं और पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने सक्रिय रूप से भाग लिया और विद्यार्थियों को उनके अधिकारों के प्रति सचेत किया।
अभियान के तहत निम्नलिखित क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित किए गए:
- सुपौल प्रखंड: सुखपुर-सोलहनी पंचायत के सीनियर सेकेंडरी प्लस टू स्कूल, कर्णपुर पंचायत का हाई मिडिल स्कूल और बसबिट्टी पंचायत का मध्य विद्यालय।
- किशनपुर प्रखंड: राजपुर पंचायत के एमएस सिसौनी, यूएचएस सिसौनी और उर्दू यूएमएस मधुरा राजपुर।
- पिपरा प्रखंड: पथरा दक्षिण पंचायत का मध्य विद्यालय बगही, पथरा उत्तर का मध्य विद्यालय और जवाहनिया का मध्य विद्यालय।
- सरायगढ़-भपटियाही प्रखंड: शाहपुर पृथ्वीपट्टी पंचायत के एमएस रामनगर, एमएस शाहपुर प्लार और यूएमएस लक्ष्मीपुर-09।
- त्रिवेणीगंज प्रखंड: थलहा गढ़िया दक्षिण पंचायत का हाई स्कूल त्रिवेणीगंज, कोरियापट्टी पश्चिम का एचएसएस कोरियापट्टी सुपौल और कुशहा पंचायत का यूएचएस मचहा।
- वीरपुर: सावित्री प्रभा आवासीय विद्यालय।
कानूनी अधिकारों और सुरक्षा के प्रति बच्चों को किया गया जागरूक
इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कानूनी जानकारी भी दी गई। विशेषज्ञों ने बच्चों को बताया कि यदि उनके साथ किसी भी प्रकार का शोषण या उत्पीड़न होता है, तो वे किन कानूनी प्रावधानों के तहत अपनी सुरक्षा कर सकते हैं और उन्हें सहायता के लिए कहाँ संपर्क करना चाहिए।
पैनल अधिवक्ताओं ने बाल संरक्षण कानूनों की बारीकियों को समझाया ताकि बच्चे अपने आसपास होने वाले अपराधों के प्रति सजग रहें। इस अभियान का लक्ष्य जिले के हर बच्चे तक विधिक जानकारी पहुँचाना है ताकि उनका बचपन सुरक्षित और भयमुक्त रह सके।