CEC के खिलाफ तेजस्वी का 'आक्रोश मार्च': पटना में हिरासत में लिए गए दिग्गज

पटना में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच राजद नेता तेजस्वी यादव को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। 8 अक्टूबर, 2026 को पटना में आयोजित 'आक्रोश मार्च' के दौरान यह घटनाक्रम हुआ, जब तेजस्वी यादव बिहार लोक भवन की ओर बढ़ रहे थे।
पटना में पुलिस से भिड़े तेजस्वी यादव
प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। तेजस्वी यादव ने पुलिस के बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश की और सुरक्षाकर्मियों के साथ उनकी तीखी झड़प भी हुई। इस दौरान केवल तेजस्वी ही नहीं, बल्कि वीआईपी (VIP) प्रमुख मुकेश सहनी और राजद सांसद मीसा भारती को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। हालांकि, बाद में इन नेताओं को रिहा कर दिया गया।
तेजस्वी यादव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन का इस्तेमाल असहमति की आवाजों को दबाने के लिए किया जा रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त को संरक्षण दिया जा रहा है।
क्या है 'वोट चोरी' का पूरा मामला?
यह विरोध प्रदर्शन मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर हो रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से लगभग 130 मिलियन मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जिसे वे 'वोट चोरी' करार दे रहे हैं।
"मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति अवैध है। जब तक उनका इस्तीफा नहीं होता, यह आंदोलन जारी रहेगा।" - राहुल गांधी
दिल्ली में राहुल और प्रियंका का शक्ति प्रदर्शन
बिहार के साथ-साथ राजधानी दिल्ली में भी विरोध की लहर तेज है। कांग्रेस पार्टी ने 8 अक्टूबर को 'काला दिवस' के रूप में मनाया।
- 6 और 7 अक्टूबर: राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिल्ली में बड़े प्रदर्शनों का नेतृत्व किया।
- प्रियंका गांधी का विरोध: प्रदर्शन के दौरान प्रियंका गांधी सड़क पर बैठकर संविधान की प्रति हाथ में लिए नजर आईं।
- हिरासत और FIR: राहुल और प्रियंका को दो बार हिरासत में लिया गया और संसद से चुनाव आयोग तक मार्च करने की कोशिश के मामले में उनके खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है।
सुरक्षा और कानूनी स्थिति
देशभर में बढ़ते तनाव को देखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा बढ़ाकर Z-प्लस श्रेणी में कर दी गई है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शनों के लिए कड़े नियम लागू कर दिए हैं, जिसमें अब 10 दिन पहले नोटिस देना अनिवार्य है।
कानूनी मोर्चे पर, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने से इनकार कर दिया है, लेकिन अदालत ने उनकी नियुक्ति के संबंध में दायर वापसी याचिका (recall petition)