'गांधी परिवार बनाम संघ परिवार' पर घमासान: BJP ने CM रेवंत रेड्डी को घेरा

Ghazala Saheb26 September 20262 min read4 viewsBihar
'गांधी परिवार बनाम संघ परिवार' पर घमासान: BJP ने CM रेवंत रेड्डी को घेरा

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा दिए गए एक हालिया बयान ने राजनीतिक गलियारों में नया विवाद खड़ा कर दिया है। रेड्डी ने भारत के भविष्य की लड़ाई को 'गांधी परिवार बनाम संघ परिवार' के रूप में पेश किया, जिस पर अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बेहद तीखा पलटवार किया है।

रेवंत रेड्डी का 'बलिदान' वाला तर्क

केरल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान 'आर्यादन मोहम्मद-2026 बेस्ट पब्लिक सर्वेंट अवार्ड' प्राप्त करते समय मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कांग्रेस और भाजपा के बीच एक वैचारिक विभाजन रेखा खींचने की कोशिश की। उन्होंने कहा:

"गांधी परिवार बलिदान का प्रतीक है: महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पद और शक्ति का त्याग किया। इसके विपरीत, संघ परिवार धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर भारत को विभाजित कर रहा है। भारत की लड़ाई दो परिवारों के बीच है।"

रेड्डी ने अपने संबोधन में एक बड़ा लक्ष्य भी साझा किया। उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र सपना राहुल गांधी को भारत का प्रधानमंत्री बनाना है। उन्होंने दावा किया कि देश को सांप्रदायिक ताकतों और लोकतंत्र की नींव को नुकसान पहुंचाने वाली शक्तियों से बचाने के लिए राहुल गांधी को सत्ता में आना होगा।

भाजपा का पलटवार: 'यह तुलना बेहद बेतुकी है'

मुख्यमंत्री के इस बयान पर तेलंगाना भाजपा के प्रवक्ता एनवी सुभाष ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने रेड्डी की तुलना को "बेहद बेतुका" (profoundly ridiculous) करार दिया। सुभाष ने कहा कि केवल नेहरू-गांधी नाम होने से यह साबित नहीं होता कि कांग्रेस पार्टी महात्मा गांधी की विचारधारा का सही अर्थों में पालन कर रही है।

भाजपा प्रवक्ता ने अपने बयान में निम्नलिखित मुख्य बातें कहीं:

  • संगठन की चुनौती: सुभाष के अनुसार, दोनों परिवारों के बीच की यह तुलना वास्तव में यह दर्शाती है कि कांग्रेस पार्टी संघ परिवार के मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क का मुकाबला करने में कितनी संघर्ष कर रही है।
  • नाम बनाम विचारधारा: उन्होंने तर्क दिया कि सिर्फ एक प्रतिष्ठित वंश का हिस्सा होने से कोई पार्टी महात्मा गांधी के आदर्शों की रक्षक नहीं बन जाती।
  • भाजपा का रुख: भाजपा ने इस तुलना का स्वागत करते हुए कहा कि यह स्पष्ट करता है कि देश के भविष्य के लिए मुकाबला कितना कठिन है।

इस बयानबाजी ने एक बार फिर देश की राजनीति में 'परिवारवाद' और 'संगठन बनाम विचारधारा' की बहस को एक बार फिर से गरमा दिया है।

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