रोहित वेमुला बिल: तेलंगाना में भेदभाव रोकने के लिए 3 महीने में बनेगा ड्राफ्ट

Ghazala Saheb16 October 20262 min read0 viewsBihar
रोहित वेमुला बिल: तेलंगाना में भेदभाव रोकने के लिए 3 महीने में बनेगा ड्राफ्ट

तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भाटी विक्रमार्क ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए अधिकारियों को रोहित वेमुला बिल तेलंगाना का प्रारंभिक मसौदा तीन महीने के भीतर तैयार करने को कहा है। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना और जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर होने वाले किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकना है।

छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर

तेलंगाना सचिवालय में प्रस्तावित कानून पर वरिष्ठ सिविल सेवकों की समिति की दूसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए, भाटी विक्रमार्क ने अधिकारियों को आवश्यक जमीनी कार्य पूरा करने और जल्द से जल्द एक ड्राफ्टिंग कमेटी गठित करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति विकास विभाग (SCDD) इस मसौदा तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व करेगा।

उपमुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि प्रस्तावित कानून को विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के लिए व्यापक कानूनी सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। यह मसौदा तीन महीने के भीतर वरिष्ठ सिविल सेवकों की समिति को विस्तृत जांच के लिए सौंपा जाना है।

विशेषज्ञों और हितधारकों से ली जाएगी राय

कानून को प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के लिए, उपमुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई। उन्होंने निर्देश दिया कि मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में निम्नलिखित समूहों और संस्थानों को शामिल किया जाए:

  • विभागीय भागीदारी: कानून विभाग को समिति में शामिल किया जाएगा, साथ ही शिक्षा विभाग, गृह विभाग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की भूमिका का भी परीक्षण किया जाएगा।
  • हितधारकों से परामर्श: मसौदे को तैयार करने के लिए छात्रों, संकाय सदस्यों, कानूनी विशेषज्ञों, नागरिक समाज संगठनों और शिक्षा विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श लिया जाएगा।

भाटी विक्रमार्क ने कहा कि ड्राफ्ट ऐसा होना चाहिए जो जमीनी स्तर पर छात्रों द्वारा सामना की जाने वाली वास्तविक समस्याओं, विशेष रूप से शिक्षण संस्थानों में भेदभाव और कानूनी सुरक्षा लागू करने की चुनौतियों को प्रभावी ढंग से संबोधित कर सके।

NALSAR विश्वविद्यालय से मिलेगी कानूनी मदद

बैठक के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि इस कानून को कानूनी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ से सहायता ली जाएगी। अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव विजयेंद्र बोई ने उपमुख्यमंत्री को सूचित किया कि NALSAR ने बिल के प्रावधानों को तैयार करने में सहयोग देने के लिए अपनी सहमति दे दी है।

सरकार का लक्ष्य एक ऐसा कानूनी ढांचा तैयार करना है जो न केवल भेदभाव को रोके, बल्कि विश्वविद्यालयों में समान अवसर और एक न्यायपूर्ण वातावरण को भी बढ़ावा दे। उपमुख्यमंत्री ने दोहराया कि सभी संबंधित विभागों को एक स्पष्ट कार्य योजना के साथ काम करना चाहिए ताकि छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Share:

Comments

Leave a comment